रामायण की 'सीता' के रूप में घर-घर पहचानी जाने वाली दीपिका चिखलिया ने अपनी पहचान के सीमित दायरे को तोड़ने की इच्छा जताई है। उन्होंने खुलासा किया कि वह अब केवल मां या दादी के किरदारों तक सीमित नहीं रहना चाहतीं।
- दीपिका चिखलिया 40 साल बाद 'सीता' की छवि से आगे बढ़कर नए और दमदार किरदार तलाश रही हैं।
- उन्होंने ग्लैमरस भूमिकाओं और स्विमिंग कॉस्ट्यूम के दबाव के कारण शुरुआती फिल्मी करियर को अलविदा कहा था।
- अब उनका पूरा फोकस ओटीटी (OTT) और फिल्मों पर है, क्योंकि टीवी का लंबा कार्य समय उनके अनुकूल नहीं है।
रामानंद सागर की कालजयी कृति 'रामायण' (1987-88) ने दीपिका चिखलिया को रातों-रात एक वैश्विक पहचान दिलाई। सीता के किरदार में उनकी सादगी और गरिमा ने उन्हें करोड़ों लोगों के दिलों में बसा दिया। हालांकि, चार दशकों के बाद, दीपिका अब इस बात को लेकर मुखर हैं कि उनकी पूरी जिंदगी और प्रतिभा केवल एक किरदार तक सीमित नहीं रह सकती।
एक हालिया साक्षात्कार में, दीपिका ने अपनी आंतरिक कशमकश को साझा किया। उन्होंने बताया कि लोकप्रियता का एक पहलू यह होता है कि दुनिया आपको एक ही छवि में कैद कर लेती है। दीपिका का मानना है कि हालांकि वह सीता के किरदार का सम्मान करती हैं, लेकिन एक कलाकार के रूप में उनकी रचनात्मक भूख अभी भी बरकरार है। वह अब ऐसे किरदारों की तलाश में हैं जो चुनौतीपूर्ण हों और उन्हें अभिनय की नई गहराइयों को तलाशने का मौका दें।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, दीपिका चिखलिया का यह बयान भारतीय मनोरंजन उद्योग में वरिष्ठ महिला कलाकारों के लिए उपलब्ध सीमित अवसरों की ओर इशारा करता है। अक्सर 50 वर्ष से अधिक उम्र की अभिनेत्रियों को केवल 'मां' या 'दादी' के स्टीरियोटाइप किरदारों में ढाल दिया जाता है। दीपिका का यह संघर्ष उस व्यापक बदलाव की मांग है जहां उम्र को प्रतिभा के आड़े नहीं आने दिया जाए।
दीपिका ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने फिल्मों से शुरुआत की थी, लेकिन वहां के माहौल और ग्लैमर की मांग ने उन्हें असहज कर दिया था। उन्होंने कहा कि लोग उन्हें स्विमिंग कॉस्ट्यूम में देखना चाहते थे और उनके लिए सीटी बजाते थे, जो उनके व्यक्तित्व के अनुकूल नहीं था। उन्होंने हमेशा सम्मानजनक काम की प्रार्थना की, और 'रामायण' उनके जीवन का वह जादुई मोड़ साबित हुआ जिसने उन्हें वह सम्मान दिलाया जिसकी वह तलाश कर रही थीं।
"मैं अपने करियर के अंत में यह महसूस नहीं करना चाहती कि मेरी पूरी जिंदगी का सार सिर्फ एक किरदार बनकर रह गया।"
आज के डिजिटल युग में, दीपिका ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ओर देख रही हैं। उनका मानना है कि वेब सीरीज और आधुनिक सिनेमा में अब उम्रदराज अभिनेत्रियों के लिए अधिक जटिल और सशक्त भूमिकाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह अब टेलीविजन की ओर नहीं लौटेंगी क्योंकि वहां काम के घंटे (प्रतिदिन 14 घंटे) बहुत अधिक होते हैं, और वह अब पैसे के बजाय संतोषजनक काम को प्राथमिकता देती हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: दीपिका चिखलिया अब किस तरह के काम में रुचि रखती हैं?
उत्तर: वह अब फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर मजबूत, दमदार और चुनौतीपूर्ण किरदारों की तलाश कर रही हैं।
प्रश्न 2: उन्होंने टेलीविजन इंडस्ट्री को क्यों नकारा?
उत्तर: टेलीविजन में काम के घंटे बहुत ज्यादा होते हैं (महीने में 22 दिन और प्रतिदिन 14 घंटे), जो अब उनके लिए संभव नहीं है।