दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर ने अपने बच्चों, फरहान और ज़ोया अख्तर के पालन-पोषण और उनके धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर एक भावुक बातचीत साझा की है। उन्होंने बताया कि कैसे उनके बच्चों ने अपनी पहचान खुद बनाई है।

  • जावेद अख्तर ने अपने बच्चों फरहान और ज़ोया की सफलता का श्रेय पूरी तरह से उन्हें स्वयं दिया है।
  • उन्होंने बच्चों के मूल्यों और नैतिकता के निर्माण में पूर्व पत्नी हनी ईरानी की मुख्य भूमिका को स्वीकार किया।
  • जावेद ने खुलासा किया कि उन्होंने अपने बच्चों को किसी विशेष धर्म से नहीं जोड़ा, जिससे वे धर्मनिरपेक्ष बने रहे।

दिग्गज गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपने बच्चों, फरहान अख्तर और ज़ोया अख्तर के परवरिश और उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर खुलकर बात की। अख्तर ने न केवल अपनी संतान की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया, बल्कि उनके नैतिक मूल्यों और उनके पालन-पोषण के पीछे की कहानी को भी साझा किया।

सफलता का श्रेय स्वयं बच्चों को

फरहान और ज़ोया की व्यावसायिक सफलता के बारे में बात करते हुए, जावेद अख्तर ने एक बहुत ही विनम्र दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने कहा कि उनके बच्चे अपनी सफलता के लिए पूरी तरह से स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सफलता में माता-पिता का कोई योगदान नहीं है, बल्कि यह उनके अपने कठिन परिश्रम और काम के प्रति ईमानदारी का परिणाम है।

जावेद ने आगे कहा, "मुझे इस बात पर गर्व है कि उन्होंने सफलता पाने के लिए कभी भी मर्यादा नहीं लांघी। उन्होंने कभी भी केवल नाम, प्रसिद्धि या पैसे के लिए काम नहीं किया और न ही कभी अश्लील या घटिया सामग्री बनाई। उनकी गरिमा उनके काम में झलकती है।"

हनी ईरानी की भूमिका और परवरिश

बच्चों के चरित्र निर्माण और उनके मूल्यों के बारे में पूछे जाने पर, जावेद ने अपनी पूर्व पत्नी हनी ईरानी को पूरा श्रेय दिया। उन्होंने बताया कि जब उनका और हनी का तलाक हुआ, तब ज़ोया लगभग 11 वर्ष की और फरहान लगभग साढ़े नौ वर्ष के थे। ये उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्ष थे।

जावेद ने कहा, "हनी ने यह सुनिश्चित किया कि वे समझें कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं। उन्होंने उन्हें स्वतंत्रता और नैतिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाना सिखाया। उनके विकास में हनी का बहुत बड़ा योगदान है।" हालांकि, जावेद ने मुस्कुराते हुए यह भी स्वीकार किया कि बच्चों में पढ़ने की आदत डालने का श्रेय वह खुद ले सकते हैं।

'क्या हम मुसलमान हैं?': धर्म पर एक गहरा सवाल

साक्षात्कार का सबसे भावुक क्षण तब आया जब जावेद ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को कभी किसी धर्म की सीमाओं में नहीं बांधा। उन्होंने बताया कि फरहान और ज़ोया 'अधार्मिक' (areligious) रहे हैं।

जावेद ने एक पुराना किस्सा सुनाते हुए कहा, "मुझे याद है फरहान करीब सात या आठ साल के थे। एक दिन स्कूल से घर लौटकर वे दौड़ते हुए मेरे पास आए और उन्होंने पूछा, 'क्या हम मुसलमान हैं?'"

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि जावेद अख्तर का यह दृष्टिकोण आज के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहाँ पहचान की राजनीति अक्सर परिवारों को प्रभावित करती है। बच्चों को धर्म के बजाय मानवता और व्यक्तिगत मूल्यों पर आधारित शिक्षा देना एक प्रगतिशील समाज की नींव रखता है।

जावेद अख्तर का यह बयान दर्शाता है कि बच्चों को पहचान के बजाय चरित्र के आधार पर विकसित करना ही सच्ची परवरिश है।
Did You Know?: जावेद अख्तर और हनी ईरानी के दो बच्चे हैं जो भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: जावेद अख्तर के बच्चों के पालन-पोषण में किसकी मुख्य भूमिका थी?
उत्तर: जावेद अख्तर के अनुसार, उनके बच्चों के मूल्यों और परवरिश में उनकी पूर्व पत्नी हनी ईरानी का सबसे बड़ा योगदान है।

प्रश्न 2: क्या जावेद अख्तर ने अपने बच्चों को कोई विशेष धर्म सिखाया?
उत्तर: नहीं, जावेद ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों को किसी विशेष धर्म से नहीं जोड़ा, जिससे वे धर्मनिरपेक्ष रहे।