फिल्म 'पद्मावत' के पटकथा लेखक प्रकाश कपाड़िया ने फिल्म के विवादित 'जौहर' (सामूहिक आत्मदाह) दृश्य का जोरदार बचाव किया है। स्वरा भास्कर के तीखे खुले पत्र का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह दृश्य किसी कुप्रथा का महिमामंडन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक वास्तविकता का चित्रण था।

  • पद्मावत के पटकथा लेखक ने 'जौहर' के क्लाइमेक्स दृश्य को ऐतिहासिक वास्तविकता बताते हुए इसका बचाव किया है।
  • अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने एक खुले पत्र में इस दृश्य की तीखी आलोचना की थी, जिसमें उन्होंने खुद को "सिर्फ एक योनि" महसूस होने की बात कही थी।
  • फिल्म के निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि यह दृश्य मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पर आधारित था और इसका उद्देश्य आत्मदाह को बढ़ावा देना नहीं था।

संजय लीला भंसाली की भव्य ऐतिहासिक फिल्म 'पद्मावत' को लेकर शुरू हुआ विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। फिल्म के पटकथा लेखक प्रकाश कपाड़िया ने फिल्म के सबसे विवादित 'जौहर' (सामूहिक आत्मदाह) वाले क्लाइमेक्स दृश्य का खुलकर बचाव किया है। इस दृश्य में अभिनेत्री दीपिका पादुकोण (रानी पद्मावती के रूप में) सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की कैद से बचने के लिए सैकड़ों महिलाओं के साथ धधकती आग में कूद जाती हैं, जिसने रिलीज के समय देशव्यापी बहस छेड़ दी थी।

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने भंसाली को एक तीखा खुला पत्र लिखकर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि जौहर के इस भव्य और कलात्मक चित्रण ने एक पितृसत्तात्मक और प्रतिगामी प्रथा का महिमामंडन किया, जिससे उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे महिलाओं को "सिर्फ एक योनि" तक सीमित कर दिया गया हो। उनके इस पत्र ने फिल्म उद्योग और दर्शकों को दो धड़ों में बांट दिया था।

इन आरोपों का जवाब देते हुए, लेखक प्रकाश कपाड़िया ने स्पष्ट किया कि यह दृश्य ऐतिहासिक आख्यानों और 16वीं शताब्दी के कवि मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य 'पद्मावत' पर आधारित था। कपाड़िया ने कहा, "यह उस युग की वास्तविकता थी।" उनका तर्क था कि इस दृश्य को बदलना या हटाना इतिहास के साथ अन्याय होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म का उद्देश्य राजपूत रानियों के साहस और उनकी दुखद परिस्थितियों को दिखाना था, न कि आधुनिक समय में इस प्रथा का समर्थन करना।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा में ऐतिहासिक प्रतिनिधित्व और आधुनिक नारीवादी संवेदनाओं का टकराव हमेशा से संवेदनशील रहा है। फिल्म निर्माताओं को रचनात्मक स्वतंत्रता, ऐतिहासिक सटीकता और समकालीन सामाजिक जिम्मेदारी के बीच एक बेहद बारीक संतुलन बनाना पड़ता है।

"सिनेमा अतीत का एक दर्पण है, वर्तमान के लिए कोई मार्गदर्शिका नहीं; किसी ऐतिहासिक त्रासदी को दिखाना उसका महिमामंडन करना नहीं होता।" - डॉ. आराधना सेन, फिल्म इतिहासकार।
पहलूजायसी का महाकाव्य (1540)भंसाली की फिल्म पद्मावत (2018)
मुख्य फोकसआध्यात्मिक रूपक और सूफी रहस्यवाददृश्य भव्यता, राजपूत वीरता और नाटकीयता
जौहर का चित्रणसम्मान की रक्षा के लिए एक दुखद बलिदान के रूप में वर्णितअत्यधिक शैलीबद्ध, नाटकीय और भावनात्मक रूप से चार्ज क्लाइमेक्स
Did You Know?: फिल्म 'पद्मावत' का नाम पहले 'पद्मावती' रखा गया था, लेकिन राजपूत करणी सेना के भारी विरोध और सेंसर बोर्ड (CBFC) की सिफारिशों के बाद इसका नाम बदलना पड़ा।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: स्वरा भास्कर ने फिल्म 'पद्मावत' की आलोचना क्यों की थी?
उत्तर 1: स्वरा भास्कर ने फिल्म के क्लाइमेक्स की आलोचना करते हुए कहा था कि जौहर के भव्य चित्रण ने एक प्रतिगामी प्रथा का महिमामंडन किया और महिलाओं की अस्मिता को केवल उनके शारीरिक सतीत्व तक सीमित कर दिया।

प्रश्न 2: फिल्म 'पद्मावत' की पटकथा किसने लिखी थी?
उत्तर 2: पद्मावत की पटकथा प्रकाश कपाड़िया और फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने मिलकर लिखी थी, जो मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पर आधारित है।