बॉलीवुड में अब केवल फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रतिद्वंद्वी सितारों को बदनाम करने के लिए भी करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। एक विशेष जांच में खुलासा हुआ है कि कैसे 'ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट' (ORM) एजेंसियां ट्रोल फार्म का उपयोग कर सोची-समझी साजिशें रचती हैं।
- बॉलीवुड में अब 'पेड ट्रोलिंग' फिल्मों के बजट का एक हिस्सा बन चुका है।
- ORM (ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट) एजेंसियां अब केवल बचाव नहीं, बल्कि हमला करने का काम कर रही हैं।
- फेक नैरेटिव और ट्रोल फार्म के जरिए बड़े सितारों जैसे आलिया भट्ट और रणबीर कपूर को निशाना बनाया जाता है।
- इस डिजिटल युद्ध का सीधा असर फिल्मों की सफलता और कलाकारों के करियर पर पड़ता है।
मुंबई के चमकते गलियारों के पीछे एक ऐसा काला बाजार फल-फूल रहा है, जो सीधे तौर पर फिल्म उद्योग की नैतिकता को चुनौती दे रहा है। यह बाजार है—पेड ट्रोलिंग का। हालिया खुलासे बताते हैं कि कैसे बड़े सितारों के प्रतिद्वंद्वी कैंप अब केवल अपनी छवि सुधारने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे 'ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट' (ORM) एजेंसियों के माध्यम से दूसरे सितारों की प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं।
डिजिटल युद्ध का नया तरीका
पहले के दौर में, प्रतिद्वंद्वी सितारे अखबारों में गुमनाम खबरें छपवाकर एक-दूसरे पर हमला करते थे। लेकिन सोशल मीडिया के युग में, यह हमला कहीं अधिक घातक और सटीक हो गया है। ORM एजेंसियां अब 'ट्रोल फार्म' का संचालन करती हैं—ये ऐसे लोगों का एक संगठित समूह है जो असली जनता होने का ढोंग करते हुए भ्रामक, अपमानजनक और झूठे पोस्ट करते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सितारा किसी विवाद में फंसता है, तो ये एजेंसियां तुरंत एक नैरेटिव सेट कर देती हैं। चाहे वह कार्तिक आर्यन के बारे में कोई अफवाह हो या आलिया भट्ट की अभिनय क्षमता पर सवाल उठाना, ये ट्रोल फार्म एक साथ मिलकर सोशल मीडिया पर शोर मचाते हैं ताकि वह सच जैसा लगने लगे।
मनोरंजन उद्योग में, अब असली प्रशंसकों के गुस्से और किराए के गुस्से के बीच का अंतर पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
क्यों यह चिंता का विषय है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल सोशल मीडिया पर होने वाली बहस नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित आर्थिक गतिविधि है। जब ट्रोलिंग का उपयोग किसी फिल्म के प्रचार को रोकने या किसी कलाकार के ब्रांड वैल्यू को कम करने के लिए किया जाता है, तो यह उद्योग के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन जाता है।
आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण और कृति सनन जैसी दिग्गज अभिनेत्रियों को भी इस संगठित हमले का सामना करना पड़ा है। कृति सनन का एक विज्ञापन केवल ट्रोलिंग के कारण वापस लेना पड़ा, जबकि दीपिका पादुकोण को उनके काम करने के घंटों पर स्टैंड लेने के लिए निशाना बनाया गया।
ऐतिहासिक संदर्भ: अखबारों से सोशल मीडिया तक
फिल्म उद्योग में छवि प्रबंधन (Image Management) हमेशा से रहा है। 1990 के दशक में, यह काम पीआर (PR) एजेंटों और अखबारों के माध्यम से होता था, जहाँ जवाबदेही और संपादकीय नियंत्रण होता था। लेकिन आज, सोशल मीडिया पर कोई संपादक नहीं है जो तथ्यों की जांच कर सके, जिससे यह प्रक्रिया अनियंत्रित और खतरनाक हो गई है।
| विशेषता | पुराना तरीका (Print Media) | नया तरीका (Social Media/ORM) |
|---|---|---|
| मुख्य माध्यम | अखबार और पत्रिकाएं | ट्विटर, इंस्टाग्राम, रेडिट |
| जवाबदेही | संपादकीय जांच संभव | लगभग शून्य (गुमनाम) |
| लागत और गति | धीमी और महंगी | अत्यधिक तीव्र और संगठित |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ORM एजेंसी क्या होती है?
उत्तर: ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट (ORM) एजेंसियां किसी व्यक्ति या ब्रांड की ऑनलाइन छवि को संभालने और सुधारने का काम करती हैं।
प्रश्न 2: क्या पेड ट्रोलिंग गैरकानूनी है?
उत्तर: हालांकि यह एक ग्रे एरिया है, लेकिन यदि इसमें मानहानि या भ्रामक जानकारी शामिल है, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।