फिल्म 'हनुमान अंश' की अभूतपूर्व सफलता के बीच निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने खुलासा किया है कि उन्होंने फिल्म के प्रति समर्पण के कारण अपनी पूरी फीस छोड़ दी और सेट पर पूरी तरह से सात्विक वातावरण बनाए रखा।
- निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने 'हनुमान अंश' के लिए अपनी पूरी निर्देशन फीस माफ कर दी।
- फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है।
- निर्देशक ने फिल्म निर्माण के दौरान 4.5 महीने तक केवल फलों का आहार लिया और सेट को पूरी तरह शाकाहारी रखा।
भारतीय सिनेमा में भक्ति और आध्यात्मिकता की वापसी का एक नया अध्याय लिखती फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर चमत्कार कर रही है। नीम करोली बाबा के जीवन और दर्शन पर आधारित यह फिल्म, जिसने शुरुआत में धीमी गति से काम किया था, अब 100 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल हो गई है। इस सफलता के पीछे फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी का अटूट समर्पण है।
हाल ही में 'द रौनक पॉडकास्ट' पर बातचीत करते हुए, चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म के लिए अपनी पूरी निर्देशन फीस त्याग दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल पैसा कमाना नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक शून्यता को भरना था जो भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ दशकों से देखी जा रही है। उन्होंने 1975 की क्लासिक फिल्म 'जय संतोषी माँ' का उल्लेख करते हुए कहा कि वह पिछले डेढ़ साल से उस फिल्म का गहन अध्ययन कर रहे थे ताकि समझ सकें कि कैसे एक भक्ति फिल्म ने 'शोले' जैसी बड़ी फिल्म के साथ रिलीज होकर भी इतिहास रच दिया था।
क्यों खास है यह फिल्म?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'हनुमान अंश' की सफलता केवल कहानी की नहीं, बल्कि उस ऊर्जा की है जिसे निर्माण के दौरान बनाए रखा गया। विशाल चतुर्वेदी ने साझा किया कि फिल्म के सेट पर पूरी तरह से सात्विक वातावरण था। वहां प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था और पूरा क्रू पूरी तरह से शाकाहारी था। इतना ही नहीं, निर्देशक ने स्वयं फिल्म की रिलीज से पहले लगभग 4.5 महीनों तक केवल फलों पर आधारित आहार (Fruit Diet) का पालन किया।
भक्ति और सिनेमा का यह संगम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जिसने दर्शकों के दिलों को छू लिया है।
विशाल चतुर्वेदी ने ओटीटी (OTT) प्लेटफार्मों के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए कड़ा प्रहार भी किया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपनी कहानी पिच की, तो उन्हें अपमानजनक प्रतिक्रिया मिली। उन्होंने कहा कि ओटीटी प्लेटफार्मों का नैरेटिव अक्सर भारतीय कहानियों के प्रति संकीर्ण होता है, और 'हनुमान अंश' की सफलता उस नैरेटिव को तोड़ने के लिए आवश्यक है।
ऐतिहासिक संदर्भ
भारतीय सिनेमा में 1970 के दशक में भक्ति फिल्मों का स्वर्ण युग था। 'जय संतोषी माँ' जैसी फिल्मों ने दिखाया था कि आध्यात्मिक विषय न केवल व्यावसायिक रूप से सफल हो सकते हैं, बल्कि वे समाज पर गहरा प्रभाव भी छोड़ सकते हैं। 'हनुमान अंश' इसी परंपरा को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'हनुमान अंश' किस पर आधारित है?
उत्तर: यह फिल्म आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन और उनके दर्शन पर आधारित है।
प्रश्न 2: फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कितनी कमाई की है?
उत्तर: फिल्म ने अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर लिया है।