'एक्सपेंडिंग एजेंसी एंड आर्काइवल साइलेंसेज' प्रदर्शनी बैंगलोर इंटरनेशनल सेंटर में महिलाओं और नस्लीय समुदायों के उन अनकहे योगदानों को सामने लाती है, जिन्हें इतिहास के पन्नों में भुला दिया गया था।

  • वैश्विक वास्तुकला में महिलाओं और नस्लीय समुदायों के ऐतिहासिक रूप से उपेक्षित योगदान पर केंद्रित।
  • अंतरराष्ट्रीय कहानियों के साथ-साथ दक्षिण भारतीय महिला वास्तुकारों के क्षेत्रीय इतिहास का समावेश।
  • अकादमिक चर्चाओं के साथ-साथ महिला निर्माण श्रमिकों के अनुभवों को जोड़ने वाली कार्यशालाओं का आयोजन।

डोमलोर स्थित बैंगलोर इंटरनेशनल सेंटर (BIC) में हाल ही में 'एक्सपेंडिंग एजेंसी' का आयोजन किया गया। यह डबलिन विश्वविद्यालय की वास्तुशिल्प इतिहासकार कैथलीन जेम्स चक्रवर्ती की एक शोध पहल है। यह पांच दिवसीय यात्रा प्रदर्शनी आधुनिक वास्तुकला के उन पहलुओं को उजागर करती है जिन्हें मुख्यधारा के इतिहास में जगह नहीं मिली।

'एक्सपेंडिंग एजेंसी एंड आर्काइवल साइलेंसेज' नामक इस प्रदर्शनी में तस्वीरों, रेखाचित्रों, अभिलेखागार (archives) और लिखित वृत्तांतों के माध्यम से उन महिलाओं और समुदायों की कहानियों को पेश किया गया है जिन्होंने दुनिया भर में निर्माण कला को आकार दिया। यह परियोजना इस बात पर सवाल उठाती है कि कैसे इतिहास में कुछ खास समूहों की आवाजों को जानबूझकर दबाया गया।

इस आयोजन का क्यूरेशन इशिता शाह, मीनाक्षी जयन (विमेन ऑफ वास्तुकला आर्काइव्स प्रोजेक्ट) और सारा मेलसेन्स (ओमिटेड फ्रॉम हिस्ट्री प्रोजेक्ट) द्वारा किया गया। यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं थी, बल्कि इसमें कार्यशालाएं और पैनल चर्चाएं भी शामिल थीं। सारा मेलसेन्स द्वारा आयोजित एक कार्यशाला में वास्तुकारों और शोधकर्ताओं ने महिला निर्माण श्रमिकों के साथ संवाद किया, ताकि निर्माण क्षेत्र के वास्तविक शारीरिक श्रम को मान्यता दी जा सके।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि वास्तुकला उद्योग में एक गहरा 'आर्काइवल साइलेंस' (अभिलेखागार की चुप्पी) है, जहाँ महिलाओं के श्रम को—चाहे वह एक पेशेवर वास्तुकार के रूप में हो या साइट वर्कर के रूप में—नजरअंदाज किया गया है। यह प्रदर्शनी वास्तुकला को केवल एक व्यक्ति की रचना के बजाय एक सामूहिक ज्ञान प्रणाली के रूप में स्थापित करती है।

प्रदर्शनी में आयरलैंड की पहली योग्य महिला वास्तुकारों में से एक सिस्टर नेस्टा फिट्ज़गेराल्ड और 1924 में पेन्सिलवेनिया विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली चीन की लिन हुइयिन जैसी वैश्विक हस्तियों की कहानियाँ शामिल हैं।

"महिलाओं के श्रम की एक स्पष्ट अनुपस्थिति है... अक्सर महिलाएं खुद यह महसूस नहीं करतीं कि वे जो बना रही हैं, वह वास्तव में एक ज्ञान प्रणाली है।" - इशिता शाह, क्यूरेटर।

भारतीय संदर्भ में, यह प्रदर्शनी 1930 के दशक के मुंबई फिल्म उद्योग के प्रभाव और आधुनिकता के प्रति महिलाओं के दृष्टिकोण को दर्शाती है। 'आर्काइवल साइलेंसेज' अनुभाग में दक्षिण भारत की महिला वास्तुकारों, विशेष रूप से बेंगलुरु की नीलम मंजुनाथ के कार्यों को प्रदर्शित किया गया है, जिन्होंने टोडा समुदाय के साथ ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से वास्तुकला को नई दिशा दी।

क्या आप जानते हैं?: प्रदर्शनी में शामिल लिन हुइयिन 20वीं सदी की शुरुआत में पारंपरिक चीनी वास्तुकला और पश्चिमी आधुनिकता के बीच सेतु बनने वाली एक अग्रणी महिला थीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: एक्सपेंडिंग एजेंसी प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं और समुदायों के योगदान को सामने लाना है जिन्होंने वास्तुकला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन जिन्हें आधिकारिक इतिहास और अभिलेखागार से बाहर रखा गया।

प्रश्न 2: इस परियोजना के मुख्य क्यूरेटर कौन हैं?
इस प्रदर्शनी का क्यूरेशन विमेन ऑफ वास्तुकला आर्काइव्स की इशिता शाह और मीनाक्षी जयन, तथा ओमिटेड फ्रॉम हिस्ट्री प्रोजेक्ट की सारा मेलसेन्स ने किया है।