मलयालम फिल्म उद्योग ने अपने दिग्गज सिनेमैटोग्राफर टी.एन. कृष्णनकुट्टी को खो दिया है, जिन्होंने अपने लंबे करियर में 70 से अधिक फिल्मों में अपना योगदान दिया।

  • टी.एन. कृष्णनकुट्टी का निधन 96 वर्ष की आयु में अलाप्पुझा में हुआ।
  • उन्होंने 1960 से शुरू हुए अपने करियर में 70 से अधिक मलयालम फिल्मों में काम किया।
  • उन्होंने दिग्गज निर्देशक हरिहरन की पहली फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मलयालम सिनेमा जगत में शोक की लहर है क्योंकि दिग्गज सिनेमैटोग्राफर टी.एन. कृष्णनकुट्टी अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने सोमवार को अलाप्पुझा, केरल में अंतिम सांस ली। उनका करियर तकनीकी उत्कृष्टता और कलात्मक दृष्टि का एक ऐसा सफर था जिसने क्षेत्रीय सिनेमा की विजुअल भाषा को गढ़ने में मदद की।

कृष्णनकुट्टी ने अपने फिल्मी सफर की शुरुआत 1960 में की थी। उन्होंने उदय स्टूडियो द्वारा निर्मित और कुंचक्को द्वारा निर्देशित फिल्म 'उम्मा' (Umma) के लिए कैमरा संचालित कर अपने करियर का आगाज़ किया। यह वह दौर था जब मलयालम फिल्म उद्योग अपनी तकनीकी नींव रख रहा था और कृष्णनकुट्टी उस बदलाव के अग्रदूत थे।

अपने शानदार करियर के दौरान, उन्होंने 70 से अधिक फीचर फिल्मों में सिनेमैटोग्राफी की। उनके करियर की एक बड़ी उपलब्धि फिल्म 'लेडीज हॉस्टल' थी, जो प्रसिद्ध फिल्म निर्माता हरिहरन की पहली निर्देशित फिल्म थी। प्रकाश और छाया के साथ उनके खेलने के अंदाज ने उन्हें उस समय के सबसे प्रभावशाली निर्देशकों की पहली पसंद बना दिया।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, टी.एन. कृष्णनकुट्टी का निधन मलयालम सिनेमा के तकनीकी इतिहास के एक जीवित दस्तावेज़ के खोने जैसा है। डिजिटल सेंसर और CGI के युग से पहले, कृष्णनकुट्टी जैसे सिनेमैटोग्राफर केवल अपनी सहज वृत्ति और प्रकाश की गहरी समझ के दम पर कालजयी दृश्य रचते थे।

उन्होंने थिक्कुरीसी सुकुमारन नायर, एम एम नेसन, पी जे एंटोनी, ससीकुमार, ए बी राज, वेणु, के पी पिल्लई और के नारायणन जैसे प्रतिष्ठित निर्देशकों के साथ काम किया। हर फिल्म के साथ उनकी बहुमुखी प्रतिभा और कहानी कहने के अंदाज में निखार आता गया।

उदय स्टूडियो के स्टूडियो-बद्ध युग से लेकर 80 के दशक की प्राकृतिक शैलियों तक का संक्रमण कृष्णनकुट्टी जैसे तकनीशियनों की वजह से संभव हुआ, जिनकी अनुकूलन क्षमता ने एक पूरी पीढ़ी को परिभाषित किया।

उनका अंतिम सिनेमैटोग्राफी असाइनमेंट 1985 में जॉर्ज वेटम द्वारा निर्देशित फिल्म 'मडकक्कायथ्रा' था। सिनेमाई कला को अपना जीवन समर्पित करने के बाद, उन्होंने सक्रिय सिनेमैटोग्राफी से संन्यास ले लिया था। वह अपनी पत्नी और तीन बच्चों के रूप में परिवार छोड़ गए हैं।

क्या आप जानते हैं?: उदय स्टूडियो, जहाँ से कृष्णनकुट्टी ने अपने करियर की शुरुआत की, केरल का पहला फिल्म स्टूडियो था और इसने राज्य के फिल्म उद्योग को स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टी.एन. कृष्णनकुट्टी की पहली फिल्म कौन सी थी?
उन्होंने 1960 में कुंचक्को द्वारा निर्देशित फिल्म 'उम्मा' से अपने करियर की शुरुआत की थी।

उन्होंने अपने करियर में कितनी फिल्मों में काम किया?
टी.एन. कृष्णनकुट्टी ने मलयालम फिल्म उद्योग में 70 से अधिक फिल्मों के लिए सिनेमैटोग्राफी की।