अपनी 93वीं जयंती पर, अदनान सामी ने खुलासा किया कि कैसे आशा भोसले और आरडी बर्मन ने उनके करियर को दिशा दी और उन्हें मुंबई आने के लिए प्रेरित किया।
- आशा भोसले ने स्वीकार किया कि आरडी बर्मन के बाद अदनान सामी ने ही उनकी आवाज की बारीकियों को सबसे बेहतर समझा।
- अदनान सामी को लंदन के बजाय मुंबई में अपना करियर शुरू करने के लिए आशा भोसले ने ही प्रेरित किया था।
- सामी का बर्मन परिवार के साथ संबंध बचपन से था, जिसने उनके संगीत सफर को गहराई से प्रभावित किया।
दिग्गज गायिका आशा भोसले की 93वीं जयंती के अवसर पर, गायक अदनान सामी ने साझा किया कि कैसे आशा और आरडी बर्मन की जोड़ी ने उनके जीवन और करियर को गढ़ा। एक विशेष साक्षात्कार में, सामी ने उन यादों को ताजा किया जब भोसले ने उन्हें भारत आने और यहाँ अपनी पहचान बनाने के लिए प्रोत्साहित किया था।
सामी के करियर का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 1997 के हिट एल्बम "कभी तो नजर मिलाओ" की रिकॉर्डिंग के दौरान आया। उस समय सामी लंदन में रह रहे थे और वहीं संगीत रिलीज करना चाहते थे, लेकिन आशा भोसले ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई हिंदी संगीत की वैश्विक राजधानी है और यदि कोई गाना मुंबई में हिट होता है, तो वह पूरी दुनिया में हिट होगा। जब सामी ने कहा कि वह वहां किसी को नहीं जानते, तो भोसले ने उन्हें कड़े शब्दों में प्रेरित किया और खुद एल्बम प्रोड्यूस करने का प्रस्ताव दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह रिश्ता केवल पेशेवर नहीं था, बल्कि यह बॉलीवुड के 'स्वर्ण युग' और 90 के दशक के 'इंडी-पॉप' विस्फोट के बीच एक सेतु था। आशा भोसले ने केवल सामी को एक मंच नहीं दिया, बल्कि उन्हें उनके अपने देश में एक सांस्कृतिक पहचान दिलाई।
बर्मन परिवार के प्रति सामी का लगाव पुर्तगाल में उनके बचपन से था। वह याद करते हैं कि फिल्मों के क्रेडिट में 'बर्मन' नाम देखते ही वह फिल्म देखने का फैसला कर लेते थे। महज 10 साल की उम्र में, लंदन के एक कॉन्सर्ट में उन्होंने अपनी मूल रचना से आरडी बर्मन और आशा भोसले दोनों को प्रभावित किया था।
"अगर पंचम आज होते तो तुम्हें देख के बड़ा खुश होता।" - आशा भोसले ने अदनान सामी से कहा।
हीथ्रो एयरपोर्ट पर विदा होते समय आशा भोसले ने सामी से कहा था, "पंचम के बाद अगर किसी ने मेरी आवाज को समझा है, तो वह तुम हो।" सामी इस तारीफ को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान मानते हैं, क्योंकि आरडी बर्मन के बाद उनकी आवाज के साथ न्याय करना एक अत्यंत कठिन कार्य था।
सामी ने स्वीकार किया कि हालांकि वह शंकर-जयकिशन, नौशाद और मदन मोहन जैसे दिग्गजों के प्रशंसक रहे हैं, लेकिन आरडी बर्मन के प्रयोगात्मक संगीत का उन पर सबसे गहरा प्रभाव पड़ा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: अदनान सामी और आशा भोसले ने किस एल्बम के जरिए साथ काम किया?
उत्तर: उन्होंने 1997 के सुपरहिट एल्बम "कभी तो नजर मिलाओ" के लिए साथ काम किया था।
प्रश्न: आरडी बर्मन की युवा अदनान सामी पर क्या प्रतिक्रिया थी?
उत्तर: आरडी बर्मन को शुरुआत में संदेह था, लेकिन जब 10 वर्षीय सामी ने कीबोर्ड पर धुन बजाकर सुनाई, तो वह बेहद प्रभावित हुए।