फिल्म निर्देशक राहुल ढोलकिया ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के समारोह को दिल्ली से हटाकर गुजरात के केवडिया ले जाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इस सम्मान के लिए महाराष्ट्र या दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे सिनेमा के बड़े केंद्रों को चुना जाना चाहिए था।
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का समारोह पहली बार दिल्ली (विज्ञान भवन) से बाहर आयोजित किया जाएगा।
- समारोह इस बार गुजरात के केवडिया (एकता नगर) में आयोजित होगा।
- निर्देशक राहुल ढोलकिया ने इस स्थान के चयन पर सवाल उठाते हुए सिनेमाई योगदान देने वाले राज्यों का नाम लिया।
- 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सम्मान प्रदान करेंगी।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार द्वारा हाल ही में घोषित किए गए फैसले के अनुसार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का भव्य समारोह अब दशकों तक दिल्ली में आयोजित होने के बाद, गुजरात के केवडिया (एकता नगर) में स्थानांतरित कर दिया गया है। इस निर्णय ने फिल्म जगत में एक नई बहस छेड़ दी है।
मशहूर फिल्म निर्माता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता राहुल ढोलकिया ने इस कदम पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। ढोलकिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि परंपरा को तोड़कर पुरस्कारों को अन्य राज्यों में ले जाना ही है, तो गुजरात को ही क्यों चुना गया? उन्होंने तर्क दिया कि इस सम्मान के लिए उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी जिन्होंने भारतीय सिनेमा के विकास में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, जैसे कि महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु या हैदराबाद।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक स्थान परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक और सिनेमाई भूगोल के प्रति दृष्टिकोण को दर्शाता है। जहाँ दिल्ली ने 1954 से इस समारोह की मेजबानी की है, वहीं केवडिया जैसे स्थान का चयन राजनीतिक और पर्यटन संबंधी महत्व को रेखांकित करता है। सिनेमाई केंद्रों (मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद) को दरकिनार कर एक नए स्थान का चयन फिल्म उद्योग के भीतर क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के मुद्दों को हवा दे सकता है।
जब आप परंपरा तोड़ रहे हैं, तो सम्मान उन राज्यों को मिलना चाहिए जिनका सिनेमा में अतुलनीय योगदान है।
गौरतलब है कि केवडिया, जिसे अब एकता नगर के नाम से जाना जाता है, दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा, सरदार वल्लभभाई पटेल की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का घर है। इस ऐतिहासिक बदलाव के बावजूद, फिल्म जगत के जानकारों का मानना है कि सिनेमा के असली गढ़ों को इस तरह के गौरवशाली समारोहों का केंद्र होना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वर्ष 1954 में जब पहले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत हुई थी, तब से लेकर अब तक अधिकांश समारोह दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किए जाते रहे हैं। 72 वर्षों के इतिहास में यह पहली बार है जब पुरस्कारों को राजधानी से बाहर ले जाया जा रहा है।
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के मुख्य विजेता
आगामी 22 सितंबर को होने वाले समारोह में कई बड़े नाम सम्मानित होंगे। आदित्य सुहास जंभले की फिल्म 'आर्टिकल 370' को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला है। वहीं, ममूटी और कार्तिक आर्यन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
| श्रेणी | विजेता / फिल्म |
|---|---|
| सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म | आर्टिकल 370 |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री | यामी गौतम |
| सर्वश्रेष्ठ अभिनेता | ममूटी और कार्तिक आर्यन |
| सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म | कल्कि 2898 AD |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का स्थान क्यों बदला गया है?
उत्तर: सरकार ने समारोह को दिल्ली से हटाकर गुजरात के केवडिया में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है, जो कि एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
प्रश्न 2: राहुल ढोलकिया ने क्या तर्क दिया है?
उत्तर: ढोलकिया का कहना है कि यदि स्थान बदला जा रहा है, तो महाराष्ट्र या दक्षिण भारतीय राज्यों जैसे सिनेमाई केंद्रों को चुना जाना चाहिए था।