बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने एक प्रतिबद्ध बैचलर से एक समर्पित पति बनने के अपने सफर और प्रियंका अल्वा के साथ उस दो घंटे की मुलाकात के बारे में बताया जिसने उनका जीवन बदल दिया।
- विवेक ओबेरॉय शुरुआत में शादी के खिलाफ थे और कुंवारे रहना पसंद करते थे।
- उनकी मां के आग्रह पर प्रियंका अल्वा से मुलाकात हुई, जो 'पहली नजर के प्यार' में बदल गई।
- अभिनेता ने समय और आपसी सम्मान को एक सफल विवाह का मुख्य आधार बताया है।
अपने निजी जीवन के बारे में खुलकर बात करते हुए, विवेक ओबेरॉय ने साझा किया कि कैसे उनकी मुलाकात उनकी पत्नी प्रियंका अल्वा से हुई। सालों तक, साथिया स्टार ने गंभीर रिश्तों से दूरी बनाए रखी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि ऐसे रिश्तों में बहुत तनाव और जटिलताएं होती हैं। उन्हें अपने भतीजे-भतीजियों और अपनी फाउंडेशन के माध्यम से मिलने वाले भावनात्मक संतोष से खुशी मिल रही थी।
मोड़ तब आया जब उनकी मां ने उन्हें मनाने की कोशिश की। ओबेरॉय के अनुसार, उनकी मां ने एक 'एंजेल' की तरह उन्हें एक लड़की से मिलने के लिए मनाया और वादा किया कि यदि उन्हें वह पसंद नहीं आई, तो वह दोबारा कभी शादी की बात नहीं करेंगी। जिस मुलाकात को महज डेढ़ घंटे की औपचारिकता माना गया था, वह उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।
ओबेरॉय याद करते हैं कि वह प्रियंका के व्यक्तित्व से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें समय का पता ही नहीं चला और उनकी फ्लाइट छूट गई। वह वहां दो-तीन दिन और रुके क्योंकि वह वापस नहीं जाना चाहते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि पहले दो घंटों के भीतर ही उन्हें उनसे गहरा प्यार हो गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शारीरिक आकर्षण नहीं था, बल्कि एक गहरा मानसिक और भावनात्मक जुड़ाव था जिसने उन्हें पूरी तरह प्रभावित कर दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ओबेरॉय की कहानी अरेंज मैरिज और लव मैरिज के बीच के अंतर को खत्म करती है। यह दिखाता है कि कैसे पारिवारिक परिचय के बाद भी एक स्वाभाविक और गहरा रोमांटिक रिश्ता पनप सकता है, जो आधुनिक समाज के लिए एक नई सोच है।
"समय प्यार की सबसे ईमानदार अभिव्यक्ति है क्योंकि यह एक ऐसा संसाधन है जिसे हम कभी वापस नहीं पा सकते।"
रोमांस से परे, ओबेरॉय ने विवाह दर्शन पर भी अपने विचार साझा किए। उनका मानना है कि प्यार तब तक टिकाऊ नहीं हो सकता जब तक उसमें समय और सम्मान न हो। उन्होंने तर्क दिया कि आज के डिजिटल युग में, जहां हर कोई व्यस्त है, यदि आपका साथी आपका समय चाहता है, तो यह प्यार का सबसे बड़ा प्रमाण है।
अभिनेता ने रिश्तों में समानता पर जोर देते हुए कहा कि मौखिक दुर्व्यवहार पूरी तरह से अस्वीकार्य है और एक सफल विवाह 'बराबरी का विवाह' होना चाहिए। मनोवैज्ञानिकों का भी यही मानना है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले महंगे तोहफों और दिखावे के बजाय, एक-दूसरे के लिए हर दिन उपस्थित रहना ही रिश्ते को मजबूत बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: क्या विवेक ओबेरॉय शुरुआत में शादी करना चाहते थे?
उत्तर: नहीं, वह गंभीर रिश्तों के तनाव और जटिलताओं से बचने के लिए कुंवारे रहना पसंद करते थे।
उत्तर: उनका मानना है कि समय और सम्मान दो अनिवार्य स्तंभ हैं जिनके बिना प्यार संभव नहीं है।