भारत के शीर्ष राजनेताओं ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ChatGPT '80s ईयरबुक ट्रेंड' को अपनाकर इंटरनेट पर हलचल मचा दी है। जहाँ कुछ इसे मनोरंजन मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष का माध्यम बना रहे हैं।
- पियूष गोयल और शशि थरूर जैसे दिग्गज राजनेताओं ने AI-जनरेटेड 80 के दशक के लुक्स साझा किए।
- सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच डिजिटल नोकझोंक देखी गई।
- AI के अत्यधिक उपयोग से होने वाले पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन फुटप्रिंट पर बहस छिड़ गई है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर), पर ChatGPT और अन्य AI टूल्स द्वारा निर्मित '1980 के दशक के ईयरबुक' फोटो का चलन तेजी से बढ़ा है। इस डिजिटल लहर में अब भारत के प्रभावशाली राजनेता भी शामिल हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल और कांग्रेस सांसद शशि थरूर जैसे व्यक्तित्वों ने अपने रेट्रो अवतार साझा किए, जिसने नेटिज़न्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
यह ट्रेंड केवल पुरानी यादों को ताजा करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे राजनीतिक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जहाँ एक ओर भाजपा और कांग्रेस के समर्थक अपने-अपने नेताओं के 'कूल' लुक्स की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे ने इन तस्वीरों को 'AI-स्लॉप' (AI-slop) करार देते हुए जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि राजनेताओं का इस तरह के वायरल ट्रेंड्स में शामिल होना उनकी 'रिलेटेबिलिटी' (relatability) बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति है। युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए अब पारंपरिक रैलियों के बजाय AI-जनरेटेड कंटेंट और मीम कल्चर का सहारा लिया जा रहा है। यह दर्शाता है कि डिजिटल डिप्लोमेसी अब केवल बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि विजुअल स्टोरीटेलिंग में बदल चुकी है।
"AI का राजनीतिक संचार में एकीकरण यह साबित करता है कि अब धारणा (perception) तथ्यों से अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।"
हालांकि, इस मनोरंजन के पीछे एक काला सच भी है। GQ इंडिया और द हिंदू जैसी रिपोर्टों ने इस बात पर जोर दिया है कि इस तरह के भारी AI प्रोसेसिंग के लिए आवश्यक कंप्यूटिंग पावर और पानी की खपत पर्यावरण के लिए हानिकारक है। आलोचकों का तर्क है कि जब दुनिया जलवायु संकट से जूझ रही है, तब केवल एक 'सेल्फी' के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा खर्च करना गैर-जिम्मेदाराना है।
ऐतिहासिक रूप से देखें तो भारतीय राजनीति में छवि प्रबंधन (Image Management) हमेशा से रहा है, लेकिन पहले यह हाथ से खींची गई तस्वीरों या प्रिंट मीडिया के जरिए होता था। अब, जेनरेटिव AI ने इसे एक क्लिक में संभव बना दिया है, जिससे वास्तविकता और कल्पना के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह '80s AI ट्रेंड' क्या है?
उत्तर: यह एक वायरल ट्रेंड है जहाँ AI टूल्स का उपयोग करके वर्तमान तस्वीरों को 1980 के दशक की अमेरिकी ईयरबुक स्टाइल में बदला जाता है।
प्रश्न 2: राजनेताओं के इस ट्रेंड में शामिल होने पर विवाद क्यों हुआ?
उत्तर: विवाद मुख्य रूप से AI के पर्यावरणीय प्रभाव और गंभीर राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने को लेकर है।