प्रसिद्ध स्तंभकार शोभा दे ने 'मिर्जापुर: द मूवी' को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने फिल्म की कहानी को दिशाहीन बताया और यहाँ तक कहा कि यह शायद केवल पुरुषों के लिए बनाई गई है।

  • शोभा दे ने फिल्म को उबाऊ बताया और स्वीकार किया कि वे स्क्रीनिंग के दौरान 15 मिनट के लिए सो गई थीं।
  • रवि किशन और अली फजल के अभिनय की प्रशंसा की, लेकिन पंकज त्रिपाठी के प्रदर्शन को 'एक जैसा' (monotonous) बताया।
  • फिल्म ने वैश्विक स्तर पर 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है, लेकिन आलोचकों की राय बंटी हुई है।

दिग्गज स्तंभकार और लेखिका शोभा दे ने हाल ही में चर्चा में रही 'मिर्जापुर: द मूवी' पर अपनी बेबाक राय साझा की है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में, उन्होंने खुलासा किया कि हालांकि उन्होंने अमेज़न प्राइम वीडियो की मूल वेब सीरीज़ नहीं देखी थी, लेकिन उन्होंने बड़े पर्दे पर इस ब्रांड के विस्तार को देखने का फैसला किया। हालांकि, उनका अनुभव बेहद निराशाजनक रहा।

शोभा दे ने इंस्टाग्राम रील के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "मिर्जापुर: द मूवी शायद बनाई ही नहीं जानी चाहिए थी। मैं बहुत उम्मीदों के साथ गई थी, लेकिन बाहर निकलते समय मेरे मन में केवल एक ही सवाल था कि आखिर चल क्या रहा था?" उन्होंने फिल्म की पटकथा को बेतरतीब टुकड़ों का समूह बताया जो कहीं नहीं पहुँचती।

अभिनय का विश्लेषण: प्रशंसा और आलोचना

फिल्म के कलाकारों की बात करते हुए, उन्होंने रवि किशन के 'बब्बन बबुआ यादव' के किरदार को शानदार बताया और अली फजल के 'गुड्डू' के अभिनय की जमकर तारीफ की। हालांकि, शोका के निशाने पर रहे पंकज त्रिपाठी। उन्होंने कहा कि कालीन भैया के रूप में त्रिपाठी का अभिनय अब दोहराव भरा और उबाऊ हो गया है, जिसमें वही पुराने हाव-भाव और संवाद अदायगी है।

"मिर्जापुर का सिनेमाई रूपांतरण अपनी मूल आत्मा खो चुका है और केवल हिंसा के सहारे टिकने की कोशिश कर रहा है।"

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि जब कोई सफल डिजिटल आईपी (IP) बड़े पर्दे पर आता है, तो उम्मीदें अत्यधिक बढ़ जाती हैं। मिर्जापुर जैसे 'मर्दाना' (masculine) टोन वाली सामग्री का एक महिला आलोचक द्वारा खारिज किया जाना यह दर्शाता है कि फिल्म की अपील केवल एक विशिष्ट वर्ग तक सीमित रह गई है, जो इसे एक व्यापक सिनेमाई अनुभव बनाने में विफल रही है।

शोभा दे ने फिल्म में अनावश्यक हिंसा और रासिका दुगल के किरदार को 'लेडी मैकबेथ' जैसा बताया। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी बताया कि उन्होंने टिकट और भेलपूरी पर पैसे खर्च किए, लेकिन बदले में उन्हें केवल बोरियत मिली। उन्होंने यहाँ तक कहा कि उनके पीछे बैठी अन्य महिलाएँ भी खर्राटे ले रही थीं, जिससे उन्हें लगा कि यह फिल्म केवल पुरुषों के लिए है।

क्या आप जानते हैं?: मिर्जापुर: द मूवी ने रिलीज के एक हफ्ते के भीतर ही वैश्विक स्तर पर 200 करोड़ रुपये कमाकर अक्षय कुमार की कई फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
कलाकारशोभा दे की रेटिंग/राय
रवि किशनशानदार और प्रभावशाली
अली फजलअविश्वसनीय रूप से अच्छा
पंकज त्रिपाठीएक जैसा और उबाऊ

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: शोभा दे ने मिर्जापुर मूवी को क्यों नापसंद किया?
उत्तर: उन्होंने फिल्म की कहानी को दिशाहीन, अनावश्यक रूप से हिंसक और उबाऊ बताया।

प्रश्न 2: फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कैसा प्रदर्शन किया है?
उत्तर: आलोचनाओं के बावजूद, फिल्म ने वैश्विक स्तर पर लगभग 200 करोड़ रुपये का संग्रह किया है।