पॉल ग्रीनग्रास द्वारा निर्देशित 'द अपराइजिंग' 1381 के किसान विद्रोह की कहानी है, लेकिन यह फिल्म अपनी धीमी गति और कमजोर पटकथा के कारण दर्शकों को प्रभावित करने में विफल रहती है।
- फिल्म 1381 के इंग्लैंड के ऐतिहासिक किसान विद्रोह पर आधारित है।
- एंड्रयू गारफील्ड मुख्य भूमिका में हैं, लेकिन उनका किरदार गहराई की कमी महसूस कराता है।
- निर्देशक पॉल ग्रीनग्रास की 'हैंडहेल्ड' कैमरा स्टाइल इस बार प्रभावी नहीं रही।
- फिल्म आधुनिक राजनीतिक दमन के साथ समानताएं बनाने की कोशिश करती है, लेकिन असफल रहती है।
हॉलीवुड में अक्सर युवा सितारों को ऐतिहासिक महागाथाओं (Historical Epics) का नायक बनाया जाता है, लेकिन दर्शकों की रुचि इनमें कम होती जा रही है। पॉल ग्रीनग्रास की नई फिल्म 'द अपराइजिंग' इसी श्रेणी में आती है। यह फिल्म 14वीं शताब्दी के इंग्लैंड की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ प्लेग की महामारी और राजा के दमनकारी करों ने आम जनता को विद्रोह के लिए मजबूर कर दिया था।
फिल्म की कहानी एंड्रयू गारफील्ड द्वारा निभाए गए 'प्लाउमैन' (Ploughman) के इर्द-गिर्द घूमती है। गारफील्ड का किरदार अपने परिवार को खोने के बाद व्यवस्था के खिलाफ खड़ा होता है। हालांकि, गारफील्ड जैसा प्रतिभाशाली अभिनेता होने के बावजूद, उनका किरदार एक 'एवरीमैन' जैसा लगता है जिसमें किसी खास आकर्षण या गहराई की कमी है। इसके विपरीत, जेमी बेल और कॉस्मो जार्विस जैसे कलाकार अपने किरदारों में अधिक स्वाभाविक लगते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, 'द अपराइजिंग' केवल एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं है, बल्कि यह सत्ता के दुरुपयोग और आम जनता के आक्रोश का चित्रण है। आज के दौर में जब दुनिया भर में सत्तावादी प्रवृत्तियां बढ़ रही हैं, यह फिल्म उन पैरेलल्स को छू सकती थी, लेकिन निर्देशक ने इसे केवल एक 'कीचड़ भरी जंग' तक सीमित रखा। फिल्म की विफलता यह दिखाती है कि केवल बड़े नाम और ऐतिहासिक संदर्भ पर्याप्त नहीं हैं; कहानी में भावनात्मक जुड़ाव होना अनिवार्य है।
ऐतिहासिक फिल्मों की सफलता अब केवल भव्यता पर नहीं, बल्कि इस बात पर निर्भर करती है कि वे समकालीन मानवीय संघर्षों को कितनी ईमानदारी से पर्दे पर उतारती हैं।
तकनीकी रूप से, ग्रीनग्रास की सिग्नेचर हैंडहेल्ड कैमरा स्टाइल, जिसने 'बोर्न' सीरीज को हिट बनाया था, यहाँ सिरदर्द बन जाती है। लड़ाई के दृश्यों में कैमरा इतना हिलता है कि दर्शक असहज महसूस करने लगते हैं। हालांकि, फिल्म के कुछ हिस्से जैसे कि राजा की माँ का किरदार और शाही परिषद के षड्यंत्र सराहनीय हैं, लेकिन वे पूरी फिल्म के बोझ को नहीं उठा पाते।
एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब अमेरिकी वितरक Focus Features ने फिल्म का नाम बदलकर 'The Uprising: The Rise of Robin Hood' करने की कोशिश की। यह कदम फिल्म के प्रति घबराहट को दर्शाता है, क्योंकि रॉबिन हुड की कहानियाँ इस विद्रोह के लगभग 200 साल बाद की हैं। यह मार्केटिंग स्टंट फिल्म की कमजोरियों को छिपाने की एक नाकाम कोशिश मात्र थी।
| विशेषता | उम्मीदें | वास्तविकता |
|---|---|---|
| अभिनय | एंड्रयू गारफील्ड का जादू | फीका और प्रभावहीन |
| सिनेमेटोग्राफी | भव्य ऐतिहासिक दृश्य | अत्यधिक हिलता हुआ कैमरा |
| कहानी | क्रांतिकारी संदेश | उबाऊ और धीमी गति |
Frequently Asked Questions
1. क्या यह फिल्म रॉबिन हुड से संबंधित है?
नहीं, फिल्म की कहानी 1381 के वास्तविक किसान विद्रोह पर आधारित है, हालांकि मार्केटिंग के लिए रॉबिन हुड का नाम जोड़ने का प्रयास किया गया था।
2. फिल्म की रिलीज डेट क्या है?
यह फिल्म अमेरिका में 11 सितंबर, यूके में 9 अक्टूबर और ऑस्ट्रेलिया में 22 अक्टूबर को रिलीज होगी।