प्रियादर्शन के निर्देशन में बनी 'हैवान' में अक्षय कुमार और सैफ अली खान की टक्कर तो है, लेकिन धीमी रफ्तार और कमजोर पटकथा फिल्म का मजा किरकिरा कर देती है।
- सैफ अली खान ने दृष्टिबाधित व्यक्ति के रूप में सराहनीय अभिनय किया है।
- अक्षय कुमार का विलेन अवतार उम्मीद के मुताबिक खौफनाक नहीं लग पाया।
- फिल्म की लंबाई (165 मिनट) और अनावश्यक गाने इसकी सबसे बड़ी कमजोरी हैं।
निर्देशक प्रियादर्शन ने अपनी ही 2016 की मलयालम हिट फिल्म 'ओप्पम' (Oppam) का हिंदी रीमेक 'हैवान' के रूप में पेश किया है। कागज पर यह फिल्म एक सुरक्षित दांव लग रही थी—एक सफल मूल कहानी, अक्षय कुमार और सैफ अली खान जैसे दिग्गज कलाकार और एक अनुभवी निर्देशक। लेकिन जब फिल्म पर्दे पर आती है, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि केवल बड़े नाम एक बेहतरीन थ्रिलर बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होते।
फिल्म की कहानी श्याम राणे (सैफ अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक दृष्टिबाधित व्यक्ति है लेकिन उसकी सुनने और सूंघने की क्षमता असाधारण है। वह मुंबई की एक ऊंची इमारत में मेंटेनेंस मैनेजर है और सबकी मदद करता है। कहानी में मोड़ तब आता है जब परशुराम गोखले (अक्षय कुमार) की एंट्री होती है, जो एक गहरे प्रतिशोध की आग में जल रहा है और जिसका इतिहास खूनी है। श्याम अनजाने में खुद को इस खतरनाक व्यक्ति और उन लोगों के बीच पाता है जिन्हें वह बचाने की कोशिश कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा में दक्षिण भारतीय फिल्मों के रीमेक का चलन बढ़ रहा है, लेकिन 'हैवान' यह साबित करती है कि बिना संपादन (Editing) और स्थानीय संवेदनशीलता के, केवल अनुवाद काफी नहीं है। फिल्म की गति इतनी धीमी है कि दर्शक मुख्य रोमांच तक पहुँचने से पहले ही ऊबने लगते हैं।
"एक थ्रिलर की सफलता उसकी रफ्तार और सस्पेंस के संतुलन पर टिकी होती है, जहाँ 'हैवान' अनावश्यक कॉमेडी और गानों के कारण अपना प्रभाव खो देती है।"
अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान ने श्याम के किरदार में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को बखूबी उतारा है, हालांकि एक्शन दृश्यों में उनकी शारीरिक क्षमता थोड़ी कमजोर लगती है। वहीं, अक्षय कुमार, जिन्होंने पहले भी नकारात्मक भूमिकाएं निभाई हैं, यहाँ थोड़े 'ओवर-द-टॉप' नजर आते हैं। उनका विलेन किरदार डराने के बजाय कभी-कभी अनजाने में हास्य पैदा कर देता है।
फिल्म के सहायक कलाकारों में शरीब हाशमी ने इंस्पेक्टर संजय शिंदे के रूप में जान फूंकी है और वह फिल्म के सबसे मनोरंजक हिस्सों में से एक हैं। दिवंगत असरानी का प्रदर्शन भी एक छोटा लेकिन प्यारा खजाना है। हालांकि, श्रिया पिलगांवकर और सयामी खेर जैसी प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों को बहुत सीमित भूमिकाएं दी गई हैं, जो फिल्म की एक बड़ी चूक है।
| विशेषता | ओप्पम (मूल फिल्म) | हैवान (रीमेक) |
|---|---|---|
| रफ्तार (Pacing) | तेज और सटीक | धीमी और खिंची हुई |
| खलनायक का प्रभाव | गहरा और डरावना | अतिरंजित (Over-the-top) |
| अवधि | संक्षिप्त और प्रभावी | 165 मिनट (अत्यधिक लंबी) |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या 'हैवान' फिल्म देखना चाहिए?
यदि आप अक्षय और सैफ के प्रशंसक हैं, तो आप इसे एक बार देख सकते हैं, लेकिन यदि आप एक टाइट थ्रिलर की तलाश में हैं, तो यह आपको निराश कर सकती है।
प्रश्न 2: क्या यह फिल्म 'ओप्पम' से बेहतर है?
नहीं, मूल मलयालम फिल्म 'ओप्पम' अपनी एडिटिंग और सस्पेंस के मामले में 'हैवान' से कहीं अधिक बेहतर और प्रभावशाली है।