कीरा अदवानी ने सोशल मीडिया पर वायरल 1980 के दशक के एआई फोटो ट्रेंड को अपनाया है। पाँच विशेष ChatGPT प्रॉम्प्ट के ज़रिए फ़ैन्स अब रेट्रो बॉलीवुड छवियाँ बना सकते हैं।
- कीरा अदवानी ने 1980 के दशक के एआई फोटो ट्रेंड को अपनाया।
- पाँच विशिष्ट ChatGPT प्रॉम्प्ट रेट्रो बॉलीवुड इमेज बनाते हैं।
- रचनात्मक उत्साह के साथ पर्यावरणीय चिंताएँ भी उठती हैं।
इंटरनेट पर 1980 के दशक की शैली में एआई‑जनित फ़ोटो बनाने का ट्रेंड तेज़ी से फैल रहा है, और अब बॉलीवुड की प्रमुख सितारा कीरा अदवानी ने इस प्रवृत्ति में कदम रखा है। इस ट्रेंड में उपयोगकर्ता ChatGPT को विशिष्ट प्रॉम्प्ट देते हैं, जिससे एआई मॉडल पुरानी फ़िल्मों की रंग‑रूप और लाइटिंग को दोहराते हुए नई तस्वीरें उत्पन्न करता है।
कीरा ने पाँच प्रमुख प्रॉम्प्ट साझा किए हैं, जिनमें "कीरा अदवानी को 1985 के क्लासिक रोमांस फ़िल्म के हीरोइन के रूप में दिखाएँ" और "कीरा के साथ फुल‑फ़्रेम विंटेज पोस्टर बनाएँ" शामिल हैं। इन प्रॉम्प्ट को उपयोग करके फ़ैन्स ने Instagram, Twitter और अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर रेट्रो‑स्टाइल की छवियाँ पोस्ट की हैं, जिससे पोस्टों पर लाखों लाइक्स और शेयर मिल रहे हैं।
यह प्रवृत्ति न केवल फ़ैन्स को nostalgic महसूस कराती है, बल्कि एआई‑आर्ट के व्यावसायिक उपयोग को भी उजागर करती है। कई अन्य भारतीय सितारे, जैसे एमएस धोनी और विराट कोहली, भी इसी तरह के प्रॉम्प्ट के साथ अपने डिजिटल अवतार बना रहे हैं, जिससे इस ट्रेंड की लोकप्रियता में इज़ाफ़ा हुआ है।
हालाँकि, पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बड़े‑पैमाने पर एआई मॉडल चलाने से ऊर्जा की खपत बढ़ती है, जिससे कार्बन फ़ुटप्रिंट बढ़ता है। कुछ पर्यावरणीय समूहों ने इस बात को उजागर किया है कि “Instagram का 80s ट्रेंड पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकता है” और उपयोगकर्ताओं को अधिक सतत विकल्प अपनाने की सलाह दी है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के रूप में, 2010 के दशक में एआई‑जनित कला ने पहले ही कला जगत में हलचल मचा दी थी, लेकिन 1980 के दशक की शैली पर फोकस नई नॉस्टैल्जिया लहर लाता है। यह नॉस्टैल्जिया 1990‑2000 के दशक में लोकप्रिय हुई “विंटेज फ़िल्टर” प्रवृत्ति का पुनरावर्तन है, जहाँ फ़ोटो‑एडिटिंग ऐप्स ने उपयोगकर्ताओं को पुराने कैमरा लुक देने की सुविधा दी थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस प्रकार के एआई‑ट्रेंड न केवल डिजिटल मार्केटिंग को पुनः आकार दे रहे हैं, बल्कि ब्रांड‑इन्फ्लुएंसर सहयोगों के लिए नई मूल्य‑निर्धारण मॉडल भी पेश कर रहे हैं। यदि एआई‑आर्ट की ऊर्जा‑खपत को नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह दीर्घकालिक पर्यावरणीय नीतियों के लिए चुनौती बन सकता है।
"एआई‑जनित रेट्रो फ़ोटो एक रचनात्मक बूम लाते हैं, परन्तु सतत ऊर्जा स्रोतों की ओर शिफ्ट होना अनिवार्य है," कहते हैं डॉ. अंजलि शर्मा, पर्यावरण विज्ञान की प्रोफ़ेसर।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या इन प्रॉम्प्ट को किसी भी एआई मॉडल के साथ उपयोग किया जा सकता है?
A1: अधिकांश प्रमुख एआई इमेज जेनरेटर, जैसे DALL·E और Midjourney, इन प्रॉम्प्ट को समझते हैं, पर परिणाम मॉडल की ट्रेनिंग डेटा पर निर्भर करता है।
Q2: इस ट्रेंड से जुड़ी पर्यावरणीय चिंताओं को कैसे कम किया जा सकता है?
A2: उपयोगकर्ता कम‑ऊर्जा वाले एआई सर्विसेज चुन सकते हैं या अपने डिजिटल कंटेंट को ऑफ़लाइन जेनरेट करके क्लाउड‑बेस्ड प्रोसेसिंग को घटा सकते हैं।