लता मंगेशकर की आवाज और मधुबाला के सौंदर्य से सजे 'मोहे पनघट पे' गीत के पीछे एक दिलचस्प कहानी है। जानिए कैसे एक गुजराती रंगमंच की रचना बॉलीवुड की सबसे बड़ी ऐतिहासिक फिल्म का हिस्सा बनी।
- 'मोहे पनघट पे' गीत मूल रूप से एक गुजराती नाटक के लिए लिखा गया था।
- रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने इस गीत के मूल लिरिक्स और धुन तैयार की थी।
- लता मंगेशकर की आवाज और नौशाद के संगीत ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई।
भारतीय सिनेमा के इतिहास में मुगल-ए-आजम एक ऐसी फिल्म है जिसे केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक अनुभव माना जाता है। इस फिल्म के हर पहलू पर बारीकी से काम किया गया था, लेकिन इसका एक सबसे लोकप्रिय गीत 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे' अपने साथ एक ऐसा रहस्य समेटे हुए है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह गीत, जो आज शास्त्रीय संगीत के प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है, वास्तव में फिल्मी पर्दे के लिए नहीं लिखा गया था।
इस गीत की उत्पत्ति एक गुजराती रंगमंच (Theatre) से हुई थी। प्रसिद्ध गुजराती कवि और नाटककार रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने इस रचना को एक नाटक के लिए तैयार किया था। जब फिल्म के निर्माताओं ने इस धुन और शब्दों की गहराई को महसूस किया, तो उन्होंने इसे फिल्म की पटकथा के अनुसार ढालने का निर्णय लिया। बाद में, गीतकार शकील बदायूनी ने इसे फिल्म के परिवेश और अनारकली के चरित्र के अनुरूप परिष्कृत किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह घटना दर्शाती है कि कैसे क्षेत्रीय कला और लोक संगीत ने बॉलीवुड के 'स्वर्ण युग' को समृद्ध किया। यदि यह गीत गुजराती नाटक तक ही सीमित रहता, तो शायद दुनिया को लता मंगेशकर और मधुबाला का वह जादुई संगम नहीं मिलता जिसने शास्त्रीय संगीत को आम जनता तक पहुँचाया।
"शास्त्रीय संगीत जब सही आवाज और सही चेहरे से मिलता है, तो वह समय की सीमाओं को पार कर अमर हो जाता है।"
फिल्म में इस गीत को मधुबाला पर फिल्माया गया, जिन्होंने अनारकली के रूप में अपनी सुंदरता और अभिनय से इस गीत में जान फूंक दी। यह गीत श्रीकृष्ण और राधा की पौराणिक प्रेमलीला का वर्णन करता है, जिसे मुगलकालीन पृष्ठभूमि में बड़ी खूबसूरती से पिरोया गया। संगीत निर्देशक नौशाद ने इसकी धुन को इस तरह व्यवस्थित किया कि यह आज 61 साल बाद भी उतना ही ताजा और कर्णप्रिय लगता है।
मुगल-ए-आजम, जिसे के. आसिफ ने निर्देशित किया था, केवल एक प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि यह सम्राट अकबर और राजकुमार सलीम के बीच के वैचारिक संघर्ष की गाथा थी। दिलीप कुमार और मधुबाला की केमिस्ट्री ने इस फिल्म को एक कल्ट क्लासिक बना दिया, जिसमें संगीत ने एक सेतु का काम किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'मोहे पनघट पे' गीत के मूल रचयिता कौन थे?
उत्तर: इस गीत के मूल लिरिक्स और धुन गुजराती कवि रघुनाथ ब्रह्मभट्ट ने एक नाटक के लिए लिखी थी।
प्रश्न 2: फिल्म मुगल-ए-आजम में इस गीत को किसने गाया था?
उत्तर: इस कालजयी गीत को स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी।