विजय देवरकोंडा की आगामी फिल्म 'रणाबली' महान मद्रास अकाल की विनाशकारी घटनाओं से प्रेरित है। जानिए कैसे एक प्राकृतिक आपदा को औपनिवेशिक अपराध में बदल दिया गया, जिसने रायलसीमा में विद्रोह की आग जलाई।

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  • रणाबली 1876-78 के महान मद्रास अकाल पर आधारित एक काल्पनिक कहानी है।
  • ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों ने स्थानीय जीवन के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दी, जिससे लाखों लोग मारे गए।
  • फिल्म अकाल के दौरान दमनकारी कराधान के खिलाफ रायलसीमा के लोगों के प्रतिरोध को दर्शाती है।

निर्देशक राहुल संक्रित्यान की फिल्म 'रणाबली' के टीज़र ने दर्शकों को पीड़ा और विद्रोह की एक ऐसी दुनिया से परिचित कराया है जहाँ अस्तित्व की लड़ाई चरम पर है। फिल्म में विजय देवरकोंडा एक योद्धा की भूमिका में हैं और रश्मिका मंदाना 'जयम्मा' का किरदार निभा रही हैं। यह फिल्म ब्रिटिश शासन के दौरान अकाल से प्रभावित रायलसीमा क्षेत्र की कहानी है, जहाँ मुख्य खलनायक सर थियोडोर हेक्टर की भूमिका अर्नोल्ड वोस्लू ने निभाई है।

यद्यपि फिल्म के पात्र काल्पनिक हो सकते हैं, लेकिन इसकी ऐतिहासिक नींव एक भयानक वास्तविकता पर टिकी है: 1876-78 का महान मद्रास अकाल। यह त्रासदी 1876 में मानसून की विफलता के साथ शुरू हुई, जिसने पूरे क्षेत्र की फसलों को तबाह कर दिया। हालांकि, ऐतिहासिक प्रमाण बताते हैं कि इस आपदा का पैमाना केवल प्राकृतिक नहीं था, बल्कि यह औपनिवेशिक लापरवाही का परिणाम था।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि 'रणाबली' केवल एक पीरियड एक्शन ड्रामा नहीं है; यह भुला दिए गए इतिहास को सिनेमाई पर्दे पर वापस लाने का एक प्रयास है। हाशिए पर रहने वाले लोगों के प्रतिरोध को केंद्र में रखकर, यह फिल्म उन औपनिवेशिक अभिलेखों को चुनौती देती है जिन्होंने इन विद्रोहों को केवल 'अपराधिक व्यवहार' कहकर खारिज कर दिया था।

उस दौर में, ब्रिटिश प्रशासन 'लेसे-फेयर' (मुक्त बाजार) अर्थशास्त्र का सख्ती से पालन कर रहा था। जब लाखों लोग भूख से मर रहे थे, तब भी साम्राज्य व्यापार राजस्व बनाए रखने के लिए भारत से अनाज का निर्यात विदेशों में करता रहा। सर रिचर्ड टेम्पल के नेतृत्व में राहत कार्य बेहद अपर्याप्त थे। रिपोर्ट्स के अनुसार, राहत शिविरों में भूखे नागरिकों को दिया जाने वाला भोजन औपनिवेशिक जेलों में कैदियों को दिए जाने वाले भोजन से भी कम कैलोरी वाला था।

महान मद्रास अकाल एक मानव-निर्मित आपदा थी जहाँ राज्य की मशीनरी का उपयोग धन निकालने के लिए किया गया, जबकि जनता दम तोड़ रही थी।

मौतों का आंकड़ा भयावह था। अकेले रायलसीमा में लगभग 7 लाख लोगों की मृत्यु हुई, जबकि पूरे भारत में यह अनुमान 1 करोड़ से अधिक है। फिल्म के टीज़र में विशेष रूप से 80 लाख मौतों का जिक्र किया गया है, जो इस त्रासदी की गहराई को दर्शाता है।

फिल्म में दिखाया गया विद्रोह एक क्रूर विरोधाभास से पैदा हुआ: ब्रिटिश सरकार उन किसानों से कर (टैक्स) वसूलना जारी रखे हुए थी जिनके पास खाने के लिए दाना तक नहीं था। इस हताशा ने ग्रामीणों को अनाज के भंडारों पर धावा बोलने और स्थानीय विद्रोह करने के लिए मजबूर किया। ब्रिटिश रिकॉर्ड्स ने इसे कानून-व्यवस्था की समस्या बताया, लेकिन रायलसीमा की लोककथाओं में इन लोगों को नायकों के रूप में याद किया जाता है।

पहलू औपनिवेशिक रिकॉर्ड ऐतिहासिक/लोककथा परिप्रेक्ष्य
अकाल का कारण प्राकृतिक मानसून विफलता नीति-जनित भुखमरी और निर्यात
प्रतिरोध अपराधिक व्यवहार/दंगे अस्तित्व के लिए वीरतापूर्ण संघर्ष
राहत कार्य आवश्यक मितव्ययिता क्रूर और अपर्याप्त राशन
क्या आप जानते हैं?: अकाल के दौरान, ब्रिटिश प्रशासन ने बाजार में हस्तक्षेप करने से इसलिए इनकार कर दिया क्योंकि उनका मानना था कि सरकारी सहायता निजी व्यापार को 'दबा' देगी और लोगों को निर्भर बना देगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रणाबली किसी विशिष्ट व्यक्ति की बायोपिक है?
नहीं, यह किसी व्यक्ति की बायोपिक नहीं है। यह महान मद्रास अकाल के दौरान सामूहिक इतिहास और लोककथाओं से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है।

फिल्म रणाबली कब रिलीज हो रही है?
यह फिल्म 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।