राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) के पूर्व छात्र और सैकड़ों कलाकारों के मार्गदर्शक चिदंबरराव जाम्बे का 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने निनासम और रंगायन जैसे संस्थानों के माध्यम से भारतीय रंगमंच को नई दिशा दी।

  • दिग्गज थिएटर व्यक्तित्व चिदंबरराव जाम्बे का 77 वर्ष की आयु में निधन।
  • निनासम रंगा शिक्षा केंद्र के प्रिंसिपल के रूप में 20 वर्षों तक सेवा दी।
  • NSD दिल्ली से स्नातक और रंगायन मैसूर के पूर्व निदेशक।
  • सैकड़ों अभिनेताओं और निर्देशकों को प्रशिक्षित करने का गौरवशाली करियर।

कर्नाटक के शिवमोगा जिले के हेगगोडू में शनिवार को भारतीय रंगमंच के एक स्तंभ, चिदंबरराव जाम्बे का निधन हो गया। 77 वर्षीय जाम्बे पिछले कुछ महीनों से श्वसन संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे देश के कला जगत में शोक की लहर है। वे अपनी पत्नी भारती जाम्बे और पुत्र जक्कना जाम्बे के साथ अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे।

जाम्बे का सफर सागर तालुक के अडडेरी से शुरू हुआ, जहाँ बचपन में ही उनका परिचय थिएटर से हुआ। उनकी प्रतिभा उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान, नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD), दिल्ली तक ले गई, जहाँ से उन्होंने स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उनके शैक्षणिक और व्यावहारिक अनुभव ने उन्हें एक ऐसा शिक्षक बनाया जिसने कला की बारीकियों को आम लोगों तक पहुँचाया।

क्यों महत्वपूर्ण है उनका योगदान

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, चिदंबरराव जाम्बे केवल एक अभिनेता या निर्देशक नहीं थे, बल्कि वे एक 'संस्थान निर्माता' थे। उन्होंने हेगगोडू स्थित निनासम रंगा शिक्षा केंद्र के प्रिंसिपल के रूप में दो दशकों से अधिक समय बिताया। यहाँ उन्होंने सैकड़ों छात्रों को प्रशिक्षित किया, जिनमें से कई आज भारत के जाने-माने निर्देशक और अभिनेता हैं। उनका प्रभाव केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने चित्रदुर्ग के सनेहल्ली थिएटर स्कूल और वाराणसी एवं बेंगलुरु में NSD के केंद्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

"भारतीय रंगमंच में शायद ही कोई ऐसी शख्सियत रही हो जिसे थिएटर स्कूलों के निर्माण का इतना व्यापक अनुभव हो; उनमें कलाकार की छिपी प्रतिभा को बाहर निकालने की अद्भुत क्षमता थी।"

जाम्बे ने अपने करियर में कई कालजयी नाटकों का निर्देशन किया। उनके प्रमुख कार्यों में 'लोक शकुंतला', 'चिरेबंदी वाडा', 'तलेदंडा', 'शर्मिष्ठा', 'मालती माधव' और 'नम्मोलगोबबा गांधी' शामिल हैं। उन्होंने मैसूर के रंगायन के निदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं, जिससे क्षेत्रीय थिएटर को एक नई पहचान मिली।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक में थिएटर की एक समृद्ध परंपरा रही है, जिसमें 'कंपनी नाटक' से लेकर आधुनिक प्रयोगात्मक थिएटर तक का सफर शामिल है। चिदंबरराव जाम्बे ने इस संक्रमण काल में एक सेतु का काम किया। उन्होंने NSD की शास्त्रीय शिक्षा को स्थानीय लोक कलाओं और क्षेत्रीय संवेदनाओं के साथ जोड़कर एक नई भाषा विकसित की, जिसने आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

क्या आप जानते हैं?: निनासम (Ninasam) भारत के सबसे प्रभावशाली थिएटर प्रशिक्षण केंद्रों में से एक माना जाता है, जिसने ग्रामीण युवाओं को वैश्विक कला मंच प्रदान किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: चिदंबरराव जाम्बे ने किन प्रमुख संस्थानों में काम किया?
उत्तर: उन्होंने निनासम रंगा शिक्षा केंद्र, रंगायन मैसूर और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के विभिन्न केंद्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाएं निभाईं।

प्रश्न 2: उनके द्वारा निर्देशित कुछ प्रसिद्ध नाटक कौन से हैं?
उत्तर: उनके प्रमुख नाटकों में 'लोक शकुंतला', 'तलेदंडा' और 'नम्मोलगोबबा गांधी' शामिल हैं।