अभिनेता विवेक दहिया ने अपनी पहचान को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही है। उन्होंने बताया कि कैसे वे अक्सर अपनी पत्नी दिव्यंका त्रिपाठी के नाम से पहचाने जाते हैं और इस पर उनकी क्या प्रतिक्रिया है।
- विवेक दहिया ने कहा कि वे 'जबरदस्ती के सम्मान' के खिलाफ हैं।
- वे अपनी पहचान को दिव्यंका के साये से बाहर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह व्यवहार आधुनिक पुरुषत्व (Masculinity) की एक नई परिभाषा है।
टेलीविजन जगत के लोकप्रिय अभिनेता विवेक दहिया ने हाल ही में एक साक्षात्कार में अपनी व्यक्तिगत और पेशेवर पहचान को लेकर एक बहुत ही गहरा और विचारोत्तेजक बयान दिया है। अक्सर देखा जाता है कि जब किसी सफल महिला के पति सार्वजनिक रूप से आते हैं, तो उन्हें 'उनकी पत्नी के पति' के रूप में पेश किया जाता है। विवेक ने इस स्थिति पर खुलकर बात की है।
विवेक ने साझा किया कि कैसे एक बार एक कार्यक्रम में उन्हें 'दिव्यंका त्रिपाठी के पति' के रूप में संबोधित किया गया था। उन्होंने बताया कि इस बात पर दिव्यंका ने भी मजाक में प्रतिक्रिया दी थी, लेकिन विवेक का मानना है कि उन्हें इस तरह के 'जबरदस्ती के सम्मान' की आवश्यकता नहीं है। उनका कहना है कि सम्मान और पहचान काम के माध्यम से स्वाभाविक रूप से आनी चाहिए, न कि किसी के नाम के सहारे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, विवेक का यह दृष्टिकोण पारंपरिक पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देता है। आमतौर पर समाज में पुरुष की पहचान को अधिक प्रधान माना जाता है, लेकिन विवेक ने स्वीकार किया है कि लंबे समय तक उनकी पहचान दिव्यंका से जुड़ी रही है। हालांकि, उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि जल्द ही समय बदलेगा और दिव्यंका को उनकी पहचान के माध्यम से जाना जाएगा।
"एक पुरुष जो अपनी पहचान के प्रति सुरक्षित है, उसे खुद को साबित करने के लिए अपनी साथी की सफलता को कम करने की आवश्यकता नहीं होती है।"
मनोवैज्ञानिक कृति शाह के अनुसार, यह मामला केवल नाम का नहीं बल्कि असुरक्षा का है। जब किसी पुरुष की आत्म-छवि उसकी सफलता से गहराई से जुड़ी होती है, तो साथी की अधिक दृश्यता (visibility) उसे असुरक्षित महसूस करा सकती है। लेकिन विवेक का व्यवहार यह दर्शाता है कि वे अपनी मर्दानगी और करियर को लेकर पूरी तरह से सुरक्षित हैं।
बदलती सामाजिक धारणाएं
आजकल के युवा जोड़े रिश्तों में समानता को नए तरीके से देख रहे हैं। equality का मतलब यह नहीं है कि दोनों का करियर एक जैसा हो, बल्कि इसका मतलब यह है कि एक साथी की सफलता दूसरे के लिए खतरा नहीं बननी चाहिए। विवेक और दिव्यंका का रिश्ता इसी आधुनिक और स्वस्थ मानसिकता का उदाहरण पेश करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. विवेक दहिया ने 'जबरदस्ती के सम्मान' के बारे में क्या कहा?
विवेक का मानना है कि उन्हें दिव्यंका के नाम के सहारे सम्मान नहीं चाहिए; वे चाहते हैं कि उनकी पहचान उनके अपने काम से बने।
2. मनोवैज्ञानिक इस व्यवहार को कैसे देखते हैं?
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, यह एक सुरक्षित और आधुनिक पुरुषत्व का संकेत है जो साथी की सफलता से असुरक्षित महसूस नहीं करता।