हैदराबाद हाई कोर्ट ने चिन्नवेदम्पत्ति जलाशय के निकट प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दी, जिसके बाद कोयंबटूर निगम ने 5 मिलियन लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले STP का निर्माण कार्य आरम्भ किया। यह प्लांट NGT मानकों के अनुसार उपचारित जल को डिसइन्फेक्ट करेगा और निरंतर ऑनलाइन मॉनिटरिंग करेगा।

कोयंबटूर निगम ने बुधवार, 8 जुलाई, 2026 को चिन्नवेदम्पत्ति जलाशय के पास स्थित पाँच मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू किया। यह कदम तब आया जब मदरास हाई कोर्ट ने जल संसाधन विभाग के एक आदेश को चुनौती देती हुई याचिका को खारिज कर दिया था।

पृष्ठभूमि और कानूनी परिप्रेक्ष्य

विवाद की जड़ें 30 मई, 2025 को जारी जल संसाधन विभाग के जनादेश (G.O. 4D) संख्या 50 में थीं, जिसमें चिन्नवेदम्पत्ति, सारवनम्पत्ति और वेल्लाकिनार क्षेत्रों के लिए ₹318.9 करोड़ मूल्यांकित भूमिगत सीवर योजना का उल्लेख था। वेंकटेश्वरन के वकील वी.एस. कैलासामी ने इस जनादेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने STP के निर्माण तथा उपचारित या अपरिष्कृत जल को जलाशय के निकट बहाने पर रोक लगाने की मांग की।

हाई कोर्ट का निर्णय और आगे की कार्यवाही

हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुर्गन की विभाजन बेंच ने सुनवाई के दौरान अतिरिक्त अधिवक्ता-जनरल के बयान को सुना, जिसमें बताया गया कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (TNPCB) ने 6 मई, 2026 को इस परियोजना के लिये सहमति दी थी। याचिकाकर्ता ने बाद में NGT से राहत मांगने के लिये याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने 29 जून, 2026 को मंजूर कर दिया।

तकनीकी विवरण और पर्यावरणीय आश्वासन

कोयंबटूर निगम ने बताया कि इस STP में Sequencing Batch Reactor (SBR) तकनीक अपनाई जाएगी, जो जल के जैविक लोड को प्रभावी रूप से घटाती है। उपचारित अपशिष्ट जल को NGT के मानकों के अनुसार डिसइन्फेक्ट किया जाएगा और उसकी गुणवत्ता को Online Continuous Effluent Monitoring System (OCEMS) के माध्यम से निरंतर निगरानी की जाएगी, जो TNPCB और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) दोनों को रियल‑टाइम डेटा भेजेगा।

जल निकासी योजना में बदलाव

प्रारम्भिक योजना में उपचारित जल को सीधे चिन्नवेदम्पत्ति जलाशय में छोड़ने का प्रस्ताव था, परंतु पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए योजना में संशोधन किया गया। अब लगभग पाँच MLD उपचारित जल को जलाशय के आउटलेट नहर में छोड़ा जाएगा, जिससे यह जल सुलुर जलाशय तक प्रवाहित होगा। यह परिवर्तन जल गुणवत्ता संरक्षण और जलस्रोतों के सतत उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये किया गया है।

समाप्ति समय‑सीमा

कोयंबटूर निगम ने आश्वासन दिया है कि पूरे निर्माण कार्य को एक वर्ष के भीतर पूर्ण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के जल निकासी एवं स्वच्छता व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार होगा।