केरल में वैयनाड के कल्लाड़ी में हुए विनाशकारी लैंडस्लाइड के बाद राज्य सरकार ने ठेकेदार को सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। हाई कोर्ट ने पीड़ितों के इलाज के खर्च और त्वरित मुआवजा देने का आदेश दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केरल सरकार ने ठेकेदार की सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी को कारण बताया
- सुरक्षित निष्कर्षण और कचरा प्रबंधन के लिए एसडीएमए ने कई चेतावनियाँ जारी कीं
- हाई कोर्ट ने पीड़ितों के उपचार खर्च और शीघ्र मुआवजा देने का आदेश दिया
केरल के वैयनाड जिले के मेप्पाड़ी के पास स्थित कल्लाड़ी में दोहरी सुरंग निर्माण के दौरान 10 जुलाई 2026 को एक विशाल लैंडस्लाइड हुआ, जिससे सात शव बरामद हुए और एक व्यक्ति अभी भी लापता है। भारी वर्षा के साथ ही खनन किए गए मिट्टी के ढेर को बिना वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों के ढेर कर रखा गया, जिससे वह अस्थिर होकर नीचे गिर गया।
परियोजना पृष्ठभूमि और चेतावनियाँ
कल्लाड़ी में चल रहे इस टनल प्रोजेक्ट का उद्देश्य वैयनाड को कोझिकोड से जोड़ना है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने 26 मई और 4 जून को ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि निकाली गई मिट्टी और निर्माण कचरे को सार्वजनिक सुरक्षा के खतरे में नहीं डालना चाहिए। इन निर्देशों में आवश्यक होने पर कार्यस्थल से श्रमिकों और स्थानीय निवासियों को हटाने की भी सलाह दी गई थी।
सरकारी हलफ़नामा और हाई कोर्ट की प्रतिक्रिया
केरल सरकार ने हाई कोर्ट के समक्ष एक हलफ़नामे में बताया कि इन चेतावनियों को ठेकेदार ने बार-बार अनदेखा किया, यहाँ तक कि लैंडस्लाइड से एक दिन पहले भी सुरक्षा उपायों की याद दिलाई गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ितों के इलाज के खर्च उठाने, मुआवजा शीघ्र जारी करने और मृतकों के शव परिवार को बिना देरी के सौंपने का आदेश दिया। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने इस मामले की निरंतर निगरानी का आश्वासन भी दिया।
पर्यावरणीय मंजूरी और भविष्य की चुनौतियाँ
सरकार ने बताया कि वह अब जांच रही है कि ठेकेदार ने परियोजना के लिए दी गई पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों का पालन किया या नहीं। यदि उल्लंघन सिद्ध होता है, तो भविष्य में ऐसे बड़े बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्टों में कड़े पर्यावरणीय एवं सुरक्षा मानकों को लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया जाएगा।
आगे का मार्ग
हाई कोर्ट ने इस प्राकृतिक आपदा से संबंधित अपने स्वयं-प्रेरित (सुओ मोतो) मामलों की सुनवाई शुक्रवार को दोबारा करने का संकेत दिया है। यह कदम राज्य की आपदा प्रबंधन नीतियों की प्रभावशीलता का परीक्षण करेगा और भविष्य में समान घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियमों की जरूरत को उजागर करेगा।