नोएडा में दो दिन की तेज़ बारिश ने हाई‑टेक इमारतों के बीच जलजमाव की तस्वीर पेश की। शहर की जल निकासी व्यवस्था की लापरवाही और अति‑निर्माण ही मुख्य कारण बन रहे हैं।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • नोएडा की मौजूदा ड्रेनेज प्रणाली पुरानी और अक्षम है
  • नालों की सफाई और प्लास्टिक कचरे का जमाव जलजमाव को बढ़ाता है
  • भविष्य में सतत योजना और बुनियादी ढाँचा अपग्रेड करना आवश्यक है

नोएडा, जो अक्सर दिल्ली‑एनसीआर का सबसे आधुनिक और हाई‑टेक शहर माना जाता है, पहली ही बारिश में खुद को जलमग्न पाता है। 10 जुलाई 2026 को हुई दो‑दिन की भारी बारिश ने शहर के प्रमुख सेक्टर‑62, 63, 75, 82, 105, 122 और एक्सप्रेसवे के सर्विस लेन को पूरी तरह तालाब में बदल दिया, जहाँ कारें आधी डूबी और पैदल यात्रियों को घुटनों तक पानी पार करना पड़ा।

पिछला इतिहास और मौजूदा बुनियादी ढाँचा

नोएडा की जल निकासी नेटवर्क का डिज़ाइन 1990‑के दशक में तब की जनसंख्या और औद्योगिक जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया था। तब से शहर की जनसंख्या कई गुना बढ़ी और हाई‑राइज़ सोसायटियों का विस्तार हुआ, जबकि नालों का विस्तार नहीं हुआ। परिणामस्वरूप, नालों में औद्योगिक और घरेलू कचरा, विशेषकर सिंगल‑यूज़ प्लास्टिक, जमा हो गया, जो जल प्रवाह को रोकता है। पुराने नालों का व्यास छोटा होने के कारण भारी वर्षा के समय जल‑स्तर तेजी से बढ़ जाता है।

प्रशासनिक लापरवाही के मुख्य कारण

प्राधिकरण कागज़ पर हर नाले की सील्ट सफाई का दावा करता है, पर जमीन पर नालों के किनारे निकाली गई मिट्टी को छोड़ दिया जाता है। बरसात के साथ यह मिट्टी वापस नालों में बहकर ड्रेनेज को जाम कर देती है। इसके अलावा, कई प्राकृतिक तालाबों को भरकर उन पर इमारतें बनायी गईं, जिससे जल को भूमिगत बहने का मार्ग नहीं बचा। अति‑निर्माण ने मिट्टी वाले क्षेत्रों को सीमेंट से ढक दिया, जिससे जल अवशोषण क्षमता घट गई।

प्रभाव और संभावित जोखिम

जलजमाव न केवल दैनिक यात्रा को बाधित करता है, बल्कि बेसमेंट में रहने वाले निवासियों के घरों, लिफ्टों और विद्युत् वायरिंग को भी नुकसान पहुँचाता है। कारों की क्षति, व्यापारिक गतिविधियों में व्यवधान और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम—जैसे जलजन्य बीमारियाँ—इन सबके कारण आर्थिक और सामाजिक प्रभाव गहरा है। यदि उचित उपाय नहीं किए गए, तो आगामी मानसून में स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

समाधान की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि नालों की नियमित सफाई, प्लास्टिक कचरे का प्रबंधन, और मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क का विस्तारण आवश्यक है। साथ ही, प्राकृतिक जलस्रोतों की सुरक्षा और नई इमारतों के लिए जल‑संकलन (रेनवॉटर हार्वेस्टिंग) जैसी तकनीकों को अपनाना चाहिए। इन कदमों से नोएडा को एक सतत, जल‑प्रतिरोधी शहर बनाया जा सकता है।