क्रिसना जल का प्रवाह 188 क्यूसेक्स तक घट गया, जबकि चेन्नई के प्रमुख जलाशयों का स्तर 48% से नीचे गिरा है। जलसंकट को रोकने के लिये WRD‑Metrowater टीम आंध्र प्रदेश की यात्रा कर अतिरिक्त जल विमोचन की मांग करेगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • कृष्णा जल का प्रवाह 188 क्यूसेक्स तक घटा
  • चेन्नई के जलाशयों की क्षमता का केवल 48% शेष
  • WRD‑Metrowater टीम अक्टूबर तक 500 क्यूसेक्स अतिरिक्त जल की मांग करेगी

चेन्नई के प्रमुख पीने के जलाशयों में जल स्तर लगातार गिर रहा है, जिससे शहरी जल सुरक्षा पर दबाव बढ़ गया है। जुलाई 10, 2026 को, जल संसाधन विभाग (WRD) और मेट्रोवॉटर के अधिकारी आंध्र प्रदेश के कंदलेरु जलाशय की ओर यात्रा करने वाले हैं, ताकि कृष्णा जल के अतिरिक्त विमोचन की माँग की जा सके।

परिस्थिति का सारांश

वर्तमान में पाँच प्रमुख जलाशयों – पोण्डी, शोलर, शिरोली, आदि – का संयुक्त भंडारण 5,630 मिलियन क्यूबिक फ़ुट (mcft) है, जो उनकी कुल क्षमता का केवल 48% है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान तिथि से लगभग 1,000 mcft कम है, जिससे जल उपलब्धता में गंभीर कमी का संकेत मिलता है।

कृष्णा जल का महत्व

कृष्णा नदी का जल, कंदलेरु जलाशय से जारी किया गया, 27 मई से चेन्नई के जलाशयों में प्रवाहित हो रहा है। इस अवधि में पोण्डी जलाशय ने लगभग 1,000 mcft कृष्णा जल प्राप्त किया है, लेकिन आजकल सीमा पर प्रवाह 188 क्यूसेक्स तक घट गया है, जो मौसमी वर्षा की कमी के साथ मिलकर जलभंडारण को घटा रहा है।

WRD‑Metrowater की रणनीति

टीम ने आंध्र प्रदेश के तेलुगु गंगा प्रोजेक्ट के अधिकारियों से मिलकर कंदलेरु जलाशय से जल विमोचन को 500 क्यूसेक्स तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है, जो अक्टूबर तक जारी रहेगा। यदि यह स्तर बरकरार रहा, तो एक महीने में लगभग 1,200 mcft अतिरिक्त भंडारण संभव होगा, जिससे शहर के जलाशय वर्ष के अंत तक पर्याप्त जल स्तर बनाए रख सकेंगे।

आगे की संभावनाएँ

कंदलेरु जलाशय वर्तमान में 22,000 mcft जल संग्रहित करता है, जबकि उसकी कुल क्षमता 68,000 mcft है। स्रीसैलम और सोमासिला जैसे अपस्ट्रीम जलाशयों से अतिरिक्त जल स्थानांतरित करने की संभावना है, जिससे कंदलेरु की भंडारण क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। इस कदम से न केवल चेन्नई बल्कि तिरुपति, कालाहास्ती और रापुर जैसे स्थानों की जल आवश्यकता भी पूरी होगी।