थूटु्कुड़ी जिले के किसान अत्रंकराई जलाशय के डी‑सिल्टिंग और साइल्ट निकालने की अनुमति हेतु जिला कलेक्टर के पास याचिका दायर कर चुके हैं। कई वर्षों से जलाशय में साइल्ट जमा होने से बरसात के पानी का भंडारण घटा, जिससे 600 एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर असर पड़ा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- किसानों ने अत्रंकराई जलाशय के डी‑सिल्टिंग और साइल्ट निकासी की अनुमति के लिए याचिका दायर की।
- जलाशय कई सालों से साइल्ट से जाम है, जिससे बरसात के पानी का संग्रह घटा और सिंचाई प्रभावित हुई।
- किसानों ने साइल्ट निकासी को नि:शुल्क करने और सरकारी राजपत्र में अनुमति प्रकाशित करने की मांग की।
थूटु्कुड़ी जिले के विलाथिकुलम तालुका में स्थित अत्रंकराई जलाशय, स्थानीय किसानों की आय का मुख्य आधार है। हाल ही में, इस जलाशय को कई वर्षों से साइल्ट हटाने की प्रक्रिया नहीं हुई, जिसके कारण बरसाती पानी का प्रवाह बिना संग्रहित हुए दूर तक बह जाता है। इस समस्या को सुलझाने के लिये, विभिन्न गाँवों के 150 से अधिक किसान थूटु्कुड़ी कलेक्टर के कार्यालय में सार्वजनिक शिकायत समाधान बैठक में याचिका दायर कर चुके हैं।
पृष्ठभूमि और समस्या का विस्तार
अत्रंकराई जलाशय सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) द्वारा प्रबंधित है, परन्तु पिछले पाँच वर्षों में कोई डी‑सिल्टिंग कार्य नहीं हुआ। साइल्ट की मोटी परत जलाशय के जलधाराओं को बाधित करती है, जिससे मानसून के समय पर्याप्त जलभंडारण नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप, अत्रंकराई, गुरुवरपट्टी, कुमरापुरम, कंधसम्यपुरम और करुथैहपुरम जैसे गाँवों में 600 एकड़ से अधिक कृषि भूमि निर्जल रह जाती है।
किसानों की मांगें
याचिका में किसानों ने स्पष्ट रूप से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: (i) जलाशय का शीघ्र डी‑सिल्टिंग, (ii) साइल्ट को नि:शुल्क निकालने की अनुमति, और (iii) इस अनुमति को सरकारी राजपत्र में प्रकाशित कर आधिकारिक रूप देना। उन्होंने यह भी बताया कि कई वर्ष पहले साइल्ट निकासी के लिये अनुमति दी गई थी, परन्तु प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन के कारण अब जलाशय को ‘साइल्ट निकासी प्रतिबंधित’ वर्ग में वर्गीकृत किया गया है। इस वजह से किसानों को पोषक तत्वों से भरपूर साइल्ट प्राप्त नहीं हो पा रहा है, जो फसलों की उर्वरता के लिये अत्यंत आवश्यक है।
समान मुद्दे और स्वास्थ्य संबंधी याचिकाएँ
समान सार्वजनिक grievance बैठक में, पुराचि भारत पार्टी के सदस्यों ने मुल्लाकडु के शहरी प्राइमरी हेल्थ सेंटर (UPHC) में अतिरिक्त डॉक्टर और दो नर्सों की नियुक्ति की मांग की। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केवल एक डॉक्टर उपलब्ध है, जिससे रोगियों को लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। साथ ही, मुथैहपुरम में स्थित शहरी स्वास्थ्य एवं वेलनेस सेंटर में चार महीनों से डॉक्टर की अनुपस्थिति है, जिसे जल्द से जल्द सुधारने की मांग की गई।
विश्लेषण और संभावित प्रभाव
यदि सरकार जल्द ही अत्रंकराई जलाशय का डी‑सिल्टिंग कार्य करेगा और साइल्ट निकासी की अनुमति देगा, तो न केवल जलसंकट कम होगा, बल्कि स्थानीय किसानों को पोषक तत्वयुक्त साइल्ट मिलकर फसल उत्पादन में वृद्धि होगी। यह कदम कृषि‑आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकता है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर की कमी को दूर करने के लिये अतिरिक्त स्टाफ की तैनाती ग्रामीण जन स्वास्थ्य में सुधार लाएगी, जिससे सामाजिक असंतोष कम होगा।