शिवमोग्गा चिड़ियाघर ने अपने क्षेत्रफल, आगंतुक संख्या और प्राणी विविधता के आधार पर मध्यम‑चिड़ियाघर की स्थिति हासिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया है, जिससे राज्य में पहला ऐसा संस्थान बन सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- शिवमोग्गा चिड़ियाघर ने 35 हेक्टेयर, 3.5 लाख वार्षिक आगंतुक और 350 प्राणियों की मानदंडों में से दो को पूरा किया है।
- पर्यावरण संरक्षण के लिए 10 लुप्तप्राय प्रजातियों में कम से कम 50 जीवों का होना अनिवार्य है; चिड़ियाघर ने इस लक्ष्य को पूरा करने हेतु अतिरिक्त प्रजातियों को आयात करने की योजना बनाई है।
- मध्यम‑चिड़ियाघर की मान्यता मिलने पर भारतीय गौर जैसे लुप्तप्राय प्रजातियों के प्रजनन कार्यक्रमों को तेज़ किया जाएगा।
कर्नाटक के शिवमोग्गा शहर के पास स्थित ट्यावरेकोप्पा टाइगर और लायन सफारी, आधिकारिक तौर पर शिवमोग्गा चिड़ियाघर, वर्तमान में "छोटा चिड़ियाघर" वर्ग में है। हाल ही में इस संस्थान ने केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) को एक विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिसमें यह दावा किया गया है कि वह दो प्रमुख मानदंडों – 35 हेक्टेयर से अधिक भूमि और 3.3 लाख वार्षिक आगंतुक – को पूरा करता है। साथ ही, 440 से अधिक जीव, 36 प्रजातियों में वितरित, इन आँकड़ों को सुदृढ़ बनाते हैं।
पृष्ठभूमि और मानदंड
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण के नियमों के अनुसार, एक चिड़ियाघर को "मध्यम चिड़ियाघर" के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है यदि वह तीन मुख्य मानदंडों में से कम से कम दो को पूरा करता है: 35 हेक्टेयर भूमि, वार्षिक 3.5 लाख आगंतुक, तथा 350 जीव 35 प्रजातियों में। इसके अतिरिक्त, कम से कम 10 लुप्तप्राय प्रजातियों में कुल 50 जीवों का होना अनिवार्य है। शिवमोग्गा चिड़ियाघर ने वर्तमान में सात लुप्तप्राय प्रजातियों के 38 जीवों को संरक्षित किया है, और शेष अंतर को पाटने हेतु भारतीय ग्रे वुल्फ (Canis lupus pallipes) और घड़ियाल (Gavialis gangeticus) जैसी प्रजातियों को पटना चिड़ियाघर से आयात करने की तैयारी कर रहा है।
संरक्षण के नए आयाम
यदि CZA द्वारा मध्यम‑चिड़ियाघर का दर्जा दिया जाता है, तो शिवमोग्गा को राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण‑प्रजनन परियोजनाओं में भाग लेने की अनुमति मिलेगी। विशेष रूप से भारतीय गौर (Bos gaurus) के प्रजनन के लिए यह संस्थान पहले से ही एक अनूठा साहसिक बिंदु बन चुका है, क्योंकि यह देश में गौर सफारी के लिए पहला चिड़ियाघर है। इस नई स्थिति से राज्य में पहली बार मध्यम‑चिड़ियाघर की स्थापना होगी, जिससे कर्नाटक की जैव विविधता नीति को बल मिलेगा।
सुरक्षा और संचालन सुधार
पिछले वर्ष मार्च में एक प्रशिक्षु पशु चिकित्सक की जलहॉस्प्स द्वारा हुई दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु ने चिड़ियाघर में सुरक्षा मानकों को पुनः जांचने का अवसर दिया। इस घटना के बाद, प्रबंधन ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की और सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया, जिससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की संभावना कम हो सके।
आगे का रास्ता
वर्तमान में, शिवमोग्गा चिड़ियाघर न केवल अपने क्षेत्रीय पर्यावरणीय महत्व को बढ़ा रहा है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण प्रयासों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की तैयारी कर रहा है। CZA की तकनीकी टीम का निरीक्षण और अंतिम स्वीकृति मिलने पर, यह संस्थान कर्नाटक की वन्यजीव नीति में एक नया मानक स्थापित करेगा।