बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई‑अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 847 मैंग्रोव पेड़ों की कटाई को चुनौती दी और निकटवर्ती क्षेत्रों में प्रतिपूर्ति वृक्षारोपण की मांग की। न्यायालय ने भविष्य में समान परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभाव को गंभीरता से देखने का आग्रह किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- बुलेट ट्रेन के लिए 847 मैंग्रोव पेड़ गिराए जाने की योजना
- हाई कोर्ट ने निकटस्थ क्षेत्रों में प्रतिपूर्ति वृक्षारोपण की मांग की
- ऑक्सीजन की कमी को लेकर भविष्य में शहरवासियों को सिलेंडर प्रयोग करना पड़ सकता है
बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि मुंबई‑अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए 3.35 हेक्टेयर वन भूमि, जिसमें 1.96 हेक्टेयर मैंग्रोव शामिल है, का विनाश पर्यावरणीय दृष्टिकोण से उचित नहीं है। न्यायालय ने महाराष्ट्र राज्य विद्युत ट्रांसमिशन कंपनी (MahaTransco) को 847 मैंग्रोव पेड़ों को काटने के लिए अनुमति देने से पहले स्थानीय स्तर पर प्रतिपूर्ति वृक्षारोपण करने का निर्देश दिया।
न्यायालय की टिप्पणी और संभावित प्रभाव
अस्थायी मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे ने कहा, “एक दिन वह दूर नहीं जब मुंबईवासियों को अपनी पीठ पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर चलना पड़ेगा, क्योंकि हवा की गुणवत्ता घटती जा रही है।” यह बयान पर्यावरणीय क्षति को रोकने के लिए अधिक कठोर नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
प्रतिपूर्ति वृक्षारोपण की वर्तमान स्थिति
राज्य के वकील मिलिंद साते ने बताया कि कंपनी ने पहले ही आवश्यक प्रतिपूर्ति राशि जमा कर दी है और जलवायु सुधार के लिए सोलेपुर जिले में वृक्षारोपण कार्य शुरू किया गया है। लेकिन न्यायालय ने इस व्यवस्था को “खाली आश्वासन” के रूप में खारिज किया, क्योंकि यह कटे हुए पेड़ों के निकट नहीं है।
पर्यावरणीय दृष्टिकोण से व्यापक चर्चा
मैंग्रोव, जो समुद्र तट के साथ रहने वाले अत्यंत महत्वपूर्ण इकोसिस्टम हैं, कार्बन को पकड़ने और समुद्री जीवन को समर्थन देने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी कटाई न केवल स्थानीय जलवायु को बिगाड़ती है, बल्कि मुंबई जैसे मेगासिटी में वायु प्रदूषण को बढ़ा देती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में समान परियोजनाओं में प्रतिपूर्ति वृक्षारोपण को स्थानीय स्तर पर नहीं किया गया तो शहर की हवा में ऑक्सीजन की कमी गंभीर हो सकती है।
भविष्य के लिए सुझाव
हाई कोर्ट ने सुझाव दिया कि भविष्य में ऐसे बड़े बुनियादी ढाँचे के प्रोजेक्ट्स के लिये पर्यावरणीय प्रतिपूर्ति को प्राथमिकता देना चाहिए और कटाई से पहले ही स्थानीय स्तर पर वृक्षारोपण कार्य आरम्भ किया जाए। यह न केवल कानूनी विवादों को कम करेगा, बल्कि सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप भी रहेगा।