तेलंगाना के पालामुरु‑रंगारेड्डी लिफ्ट इर्रिगेशन स्कीम (PRLIS) की नर्लापुर पंप हाउस में एक पंप की वेट रन सफल रही। यह कदम स्थायी बिजली आपूर्ति और किसान‑समुदाय के लिए जल सुरक्षा को सुदृढ़ करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- PRLIS के नर्लापुर पंप हाउस में एक पंप की वेट रन सफल हुई।
- ₹160 करोड़ की फंडिंग से स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हुई।
- किसानों को एल निनो के प्रभाव से बचाने हेतु जल भंडारण को तेज किया जाएगा।
तेलंगाना के नागरकुर्नूल जिले में स्थित नर्लापुर पंप हाउस ने प्रलिस (Palamuru‑Rangareddy Lift Irrigation Scheme) के तहत अपनी जल आपूर्ति को स्थिर करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। 14 जुलाई 2026 को, परियोजना के इंजीनियरों ने एक पंप का वेट रन (पानी के साथ परीक्षण) सफलतापूर्वक किया, जिससे न केवल तकनीकी पुष्टि हुई बल्कि राज्य सरकार की जल नीति में नई दिशा भी मिली।
पृष्ठभूमि और वित्तीय समर्थन
PRLIS, जो 2015 में शुरू हुआ एक महत्वाकांक्षी लिफ्ट इर्रिगेशन परियोजना है, का उद्देश्य जल अभाव वाले क्षेत्रों में जल को ऊपर उठाकर खेती योग्य बनाना है। इस परियोजना के लिए केंद्र और राज्य दोनों से कुल ₹160 करोड़ की फंडिंग जारी की गई, जिससे पंपों के लिए स्थायी बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हुई। यह निधि, सरकार के सलाहकार द्वारा लिफ्ट इर्रिगेशन परियोजनाओं के समर्थन में दी गई याचिका के बाद उपलब्ध हुई।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
मुख्यमंत्री अ. रेवनथ रेड्डी की हालिया यात्रा के बाद पंप हाउस में बिजली व्यवस्था को स्थायी रूप से स्थापित किया गया। इस कदम को पूर्व मंत्री तथा BRS नेता एस. निरंजन रेड्डी ने किसान समुदाय की सुरक्षा के संदर्भ में सराहना की, विशेषकर इस वर्ष के एल निनो‑प्रेरित सूखे के दौरान। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि वेट रन किए गए पंपों को तुरंत चालू करके उन जलाशयों को भरें जहाँ कर्नाटक में बाढ़ का खतरा है।
भविष्य की दिशा
नर्लापुर पंप की सफलता के बाद, PRLIS के अन्य पंप हाउस, जैसे येदुला पंप‑हाउस, भी 2023 में वेट रन कर चुके हैं। अब सरकार का फोकस इन पंपों को निरंतर संचालन में लाना और जल संग्रहण एवं वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करना है, जिससे खेती में जल की निरंतर उपलब्धता बनी रहे। इस पहल से न केवल जल सुरक्षा बल्कि ग्रामीण आर्थिक विकास में भी सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, नर्लापुर पंप की वेट रन सफलता, जल प्रबंधन में तकनीकी दक्षता, वित्तीय प्रतिबद्धता और राजनीतिक समर्थन का संगम दर्शाती है, जो तेलंगाना के किसान‑समुदाय के लिए एक आशा की किरण बन रही है।