पंजाब में 2026 खरीफ़ में सीधे बीज वाले धान (DSR) की खेती 4 लाख एकड़ तक पहुँच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36% अधिक है। इस वृद्धि में 31,478 किसानों ने भाग लिया, जबकि फज़िल्का, श्री मुकतसर साहिब और फ़रोजपुर प्रमुख जिलों में सबसे अधिक विस्तार देखा गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 4 लाख एकड़ पर सीधे बीज वाले धान की खेती बढ़ी
- 31,478 किसानों ने तकनीक अपनाई, 36% वृद्धि
- फज़िल्का, श्री मुकतसर साहिब, फ़रोजपुर प्रमुख जिलें
पंजाब की कृषि विभाग ने 2026 खरीफ़ में सीधे बीज वाले धान (Direct Seeded Rice – DSR) के तहत 4,00,433.26 एकड़ भूमि को दर्ज किया, जो पिछले साल की 2,94,000 एकड़ से 36.2% अधिक है। इस वर्ष 31,478 पंजीकृत किसान इस जल‑संकट‑मुक्त तकनीक को अपनाकर राज्य के जल संसाधन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रमुख जिलों में विस्तार
वृद्धि का अधिकांश भाग दक्षिण‑पश्चिम पंजाब में केंद्रित है। फज़िल्का सबसे बड़ा DSR जिला बन गया है, जहाँ 12,063 किसानों द्वारा 1,55,422.77 एकड़ पर यह तकनीक लागू की गई है। इसके बाद श्री मुकतसर साहिब (1,06,038.81 एकड़) और फ़रोजपुर (38,088.59 एकड़) आते हैं, जो कुल DSR क्षेत्र के 81% से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इतिहास और चुनौतियां
DSR को 2010 में जल‑भरण को रोकने के लिये प्रोत्साहित किया गया था, पर शुरुआती वर्षों में खरपतवार नियंत्रण, मिट्टी की उपयुक्तता और पोषक तत्वों की कमी जैसी तकनीकी समस्याओं ने अपनाने को धीमा कर दिया। 2015 में 4.07 लाख एकड़ तक पहुँचने के बाद 2016‑2019 में गिरावट आई, लेकिन कोविड‑19 महामारी के दौरान श्रम की कमी के कारण 2020‑2021 में फिर से उछाल आया। 2022‑2024 में गिरावट के बाद 2025‑2026 में पुनः तेज़ी से वृद्धि हुई।
पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ
परम्परागत पेडी की तुलना में DSR में बीज सीधे नमी वाले मिट्टी में बोए जाते हैं, जिससे पहली सिंचाई लगभग तीन हफ़्ते बाद ही होती है। यह तकनीक प्रति एकड़ 15‑20% जल बचत करती है और श्रम की आवश्यकता को घटाती है। राज्य सरकार प्रत्येक एकड़ पर 1,500 रुपये का प्रोत्साहन प्रदान कर रही है, जिससे किसानों को लगभग 61 करोड़ रुपये का कुल समर्थन मिल रहा है।
आगे का रास्ता
पंजाब के संयुक्त निदेशक (प्लांट प्रोटेक्शन) निरंदर सिंह बेनीपाल ने कहा कि DSR का विस्तार किसानों में भरोसा बढ़ाने, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी प्रोत्साहनों से संभव हो रहा है। उन्होंने मध्य और दोआबा जिलों में भी इस तकनीक को अपनाने के लिए निरंतर फील्ड‑लेवल समर्थन की बात की। यदि इन प्रयासों को निरंतरता मिलती रही, तो पंजाब में धान की खेती को स्थायी बनाने में DSR एक मुख्य आधार बन सकता है।