कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शिवमोग्गा में 25 लाख पौधों की बेज़ी और सरोवर पुनरुज्जीवन अभियान 2026 का अनावरण किया। मुख्य जिला न्यायाधीश ने युवाओं को पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • शिवमोग्गा में 25 लाख पौधों की बेज़ी का लक्ष्य
  • सुरक्षित जल आपूर्ति के लिए सरोवर पुनरुज्जीवन
  • आगामी पाँच वर्षों में पौधों की देखभाल और निगरानी

शिवमोग्गा, 14 जुलाई 2026 – कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KSLSA) ने अपने ‘अफोरेस्टेशन और लेक रेजुवेनेशन कैंपेन‑2026’ को औपचारिक रूप से प्रारम्भ किया। इस पहल में वन विभाग, जल विभाग और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से 25 लाख पौधों की बेज़ी तथा कई जलाशयों की सफ़ाई‑पुनर्स्थापना शामिल है।

पृष्ठभूमि और महत्व

कर्नाटक में पिछले दशक में वन आवरण में गिरावट और जलस्तर में उतार‑चढ़ाव ने पर्यावरणीय तनाव को बढ़ा दिया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के साथ, प्रदेश में मानव‑पशु संघर्ष और जल की कमी की रिपोर्टें बढ़ी हैं। इस संदर्भ में, KSLSA ने कानूनी ढाँचे को पर्यावरणीय पहल के साथ जोड़ते हुए, सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।

मुख्य कार्यक्रम और भागीदारी

मुख्य जिला और सत्र न्यायाधीश मनजुना था जी.ए. ने उद्घाटन समारोह में कहा, “हर नागरिक को वन‑धन की रक्षा में सैनिक की तरह कार्य करना चाहिए।” उन्होंने युवाओं को इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और दीर्घकालिक देखभाल में सहयोग करने का आग्रह किया। प्रमुख वन संरक्षक के.टी. हनुमंथप्पा ने बताया कि सरोवरों की पुनर्स्थापना से न केवल जल की शुद्धता बढ़ेगी, बल्कि वायुमंडलीय प्रदूषण भी घटेगा।

भविष्य की दिशा

समिति के सदस्य-सेक्रेटरी एम.एस. संतोश ने बताया कि अगले पाँच वर्षों में बेज़ी किए गए पौधों की देखभाल, जल स्रोतों की नियमित सफ़ाई और स्थानीय समुदायों को पर्यावरणीय शिक्षा प्रदान करने के लिए विस्तृत योजना तैयार की गई है। यह पहल कर्नाटक में जल‑संकट को कम करने और वन‑आधार को पुनर्स्थापित करने के लिए एक मॉडल बन सकती है।

शिवमोग्गा जिले के न्यायालय के कई न्यायाधीश, वन विभाग के अधिकारी और स्थानीय युवा समूह इस कार्यक्रम में उपस्थित थे, जिससे इस पहल की सामाजिक स्वीकृति स्पष्ट होती है।