चेन्नई महानगर निगम ने आगामी उत्तरपूर्वी मानसून की तैयारी में 115 जल निकासी के लुप्त लिंक की पहचान की। इन खामियों को बंद करने के लिए तेज़ी से कार्य शुरू किया जाएगा, जिससे बाढ़ जोखिम कम हो सकेगा।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 115 लुप्त जल निकासी लिंक की पहचान की गई
- मुख्य जल निकासी परियोजनाओं को सितंबर‑अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य
- केंद्रीय फंड और KfW समर्थन से बड़े पैमाने पर ड्रमवर्क चल रहा है
चेन्नई महानगर निगम (GCC) ने उत्तरपूर्वी मानसून की पूर्व तैयारियों के तहत शहर के जल निकासी नेटवर्क में मौजूद 115 लुप्त लिंक की पुष्टि की। यह कदम बाढ़ रोकथाम और जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक माना गया, जिससे शहरी बुनियादी ढाँचा अधिक लचीलापन हासिल कर सके।
परिचय और पृष्ठभूमि
वर्षों से चेन्नई को भारी बारिश और असंतुलित जल निकासी के कारण बार‑बार बाढ़ की समस्या का सामना करना पड़ता रहा है। पिछले कुछ दशकों में शहरी विस्तार, अनियोजित निर्माण और कचरे के अनियंत्रित निपटान ने मौजूदा नालियों को अकारगर बना दिया। इस संदर्भ में, ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन ने एक विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसके परिणामस्वरूप 115 छोटे‑छोटे गैप मिले, जिनमें मुख्यतः पाइपलाइन, ट्रांसफ़ॉर्मर और गैस पाइप के स्थानांतरण के कारण बाधाएँ उत्पन्न हुईं।
वर्तमान कार्य योजना
बुधवार को आयोजित मोनसून तैयारी बैठक में मुख्य सचिव एम. साई कुमार और सार्वजनिक कार्य विभाग (PWD) के मंत्री आधव अर्जुना ने इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लुप्त लिंक को जल्द से जल्द बंद करने के लिए सभी संबंधित विभागों के साथ समन्वय किया जाएगा। साथ ही, चेन्नई मेट्रो रेल लाइंग (CMRL) को भी प्रमुख नालियों में जमा हुए बड़े पत्थरों को हटाने का निर्देश दिया गया, ताकि जल प्रवाह में बाधा न आए।
GCC के आयुक्त जी.एस. सामीरन ने बताया कि ये लुप्त लिंक छोटे‑छोटे अंतराल हैं, जिनमें पोस्ट बॉक्स, ट्रांसफ़ॉर्मर और गैस पाइप जैसी उपयोगिताएँ मौजूद हैं। विभागीय समन्वय के माध्यम से इन्हें एक‑एक करके साफ़ किया जाएगा।
मुख्य जल निकासी परियोजनाएँ
लुप्त लिंक के अलावा, कई बड़े स्टॉर्म वाटर ड्रेन (SWD) कार्य भी शेष हैं, जैसे कि MRH रोड से पुज़ाल सरप्लस, ईस्ट एवेन्यू रोड से ओटेरी नल्ला, और आर्कॉट रोड के दोनों ओर नाली कार्य। इन सभी को 31 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, 44 नालियों की नियमित डी‑सिल्टिंग कार्य रोबोटिक एक्सकैवेटर, मिनी‑अँफ़िबियन और अन्य आधुनिक उपकरणों से चल रही है।
पिछले महीने 33 में से 28 नालियों का सुधार कार्य समाप्त हो चुका है; शेष नालियों को 15 अक्टूबर तक समाप्त किया जाएगा। पूंजी फंड के तहत दीवार उन्नयन, फेंसिंग और डी‑सिल्टिंग जैसी सुधारात्मक कार्रवाइयाँ भी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं।
भविष्य की दिशा
ड्रेन नेटवर्क की कुल लंबाई 310 किमी में से 264.20 किमी KfW‑समर्थित इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेन प्रोजेक्ट के तहत पूरा हो चुका है। शेष प्राथमिक खंडों को 15 अक्टूबर तक समाप्त करने का लक्ष्य है। इस तरह, कुल 140 किमी लक्ष्य में से 103 किमी कार्य पहले ही समाप्त हो चुका है, जिससे बाढ़ जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इन सभी प्रयासों के बावजूद, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि निरंतर रखरखाव और सार्वजनिक जागरूकता अभिन्न हैं। जल निकासी प्रणाली के दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए सतत निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग आवश्यक होगी।