केरल वन विभाग ने ‘ऊरुनरवु’ पहल के तहत वन क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भूमि आवंटन, स्कूल और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। यह योजना पारंपरिक ज्ञान को वन संरक्षण और मानव‑वन्यजीव संघर्ष को कम करने में भी जोड़ती है।

मुख्य बिंदु

  • केरल में 36 जनजातीय बस्तियों को नई भूमि और बुनियादी सुविधाएँ मिलेंगी
  • प्राथमिक स्कूल, आंगनवाड़ी और सामुदायिक हॉल का निर्माण होगा
  • जनजातीय युवा विशेष वन रेज़र्व फोर्स में प्राथमिकता के साथ भर्ती होंगे

केरल वन विभाग ने ‘ऊरुनरवु’ नामक नई पहल का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाली जनजातियों के जीवन स्तर को उन्नत करना है। इस कार्यक्रम को वानियाम्पुझा जनजातीय बस्ती में आयोजित समारोह में वन मंत्री शिबु बेबी जॉन ने प्रस्तुत किया।

विभाग ने वानियाम्पुझा में प्री‑प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक हॉल के साथ-साथ करुलाई वन में मंदक्कडावु में आंगनवाड़ी स्थापित करने का वादा किया। साथ ही, सात साल पहले बाढ़ से विस्थापित थंडंकल्लु जनजाति के परिवारों को पुनर्वासित करके उन्हें स्थायी आवास प्रदान किया जाएगा।

यदि भूविज्ञान विभाग उनके पूर्व बस्ती स्थल को रहने योग्य घोषित करता है, तो वह भूमि पुनः लौटाई जाएगी; अन्यथा केंद्रीय मंजूरी के बाद छह महीने के भीतर वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाएगी।

जनजातीय युवाओं को प्रस्तावित 500 सदस्यीय विशेष वन रेज़र्व फोर्स में प्राथमिकता के साथ भर्ती किया जाएगा और उन्हें जिम्मेदार पर्यटन परियोजनाओं के तहत गाइड‑क्यू गार्ड के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा।

Historical Background

केरल में जनजातियों के अधिकारों को संरक्षित करने के लिए 2006 में वन अधिकार अधिनियम पारित किया गया, जिससे वन क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को कानूनी सुरक्षा मिली। पिछले दशकों में बाढ़, भूमि दावों और मानव‑वन्यजीव टकराव ने इन समुदायों की सामाजिक‑आर्थिक स्थिति को नाज़ुक बना दिया था, जिससे सरकार को नई रणनीतियों की आवश्यकता महसूस हुई।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that empowering tribal communities with land rights and education not only curbs illegal encroachments but also leverages their indigenous knowledge for sustainable forest management, reducing human‑wildlife conflicts by up to 30% in pilot zones.

“जनजातीय ज्ञान को वन संरक्षण में शामिल करना पर्यावरणीय स्थिरता की कुंजी है,” कहा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंजली शर्मा।
Did You Know?: केरल में वन अधिकार अधिनियम के तहत अब तक 1.2 करोड़ हेक्टेयर से अधिक भूमि को जनजातियों को कानूनी तौर पर सौंपा जा चुका है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ‘ऊरुनरवु’ योजना के तहत किन जनजातियों को सबसे पहले लाभ मिलेगा?
उत्तर: वानियाम्पुझा, मंदक्कडावु और थंडंकल्लु सहित कुल 36 बस्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रश्न 2: नई नियुक्ति और प्रशिक्षण कार्यक्रम कब शुरू होंगे?
उत्तर: 2026 के अंत तक विशेष वन रेज़र्व फोर्स का गठन होगा और प्रशिक्षण मॉड्यूल अगले वित्तीय वर्ष में लागू किया जाएगा।