चेन्नई के मल्लवन जलाशय प्रोजेक्ट के खिलाफ 25 से अधिक पर्यावरण समूहों ने आवाज उठाई है। उन्होंने सरकार से निर्माण कार्य रोकने और एक स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल गठित करने की मांग की है।

मुख्य बातें

  • 25 से अधिक पर्यावरण संगठनों ने मल्लवन जलाशय परियोजना के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की है।
  • समूहों का कहना है कि वर्तमान तकनीकी समिति में 'हितों का टकराव' है क्योंकि विभाग खुद इस प्रोजेक्ट का प्रस्तावक है।
  • स्थानीय मछुआरा समुदायों और स्वतंत्र विशेषज्ञों को समीक्षा पैनल में शामिल करने की मांग की गई है।
  • परियोजना के कारण कोवलम-नेम्मली नमक के दलदलों और 12,000 से अधिक मछुआरों की आजीविका को खतरा बताया गया है।

चेन्नई स्थित 'सेव नेम्मली मार्शलैंड्स कलेक्टिव' के बैनर तले काम कर रहे 25 से अधिक पर्यावरण और सामुदायिक संगठनों ने तमिलनाडु सरकार से एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप की मांग की है। इन समूहों ने प्रस्तावित मल्लवन जलाशय परियोजना की जांच करने वाली उच्च स्तरीय तकनीकी समिति के पुनर्गठन और सभी निर्माण गतिविधियों को तत्काल निलंबित करने का आग्रह किया है।

समूहों ने ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन. आनंद और मुख्य सचिव एम. साई कुमार को लिखे पत्र में तर्क दिया कि वर्तमान समिति, जिसका नेतृत्व जल संसाधन विभाग (WRD) के मुख्य अभियंता कर रहे हैं, निष्पक्ष नहीं हो सकती। चूंकि WRD ही इस परियोजना का मुख्य प्रस्तावक है, इसलिए समिति की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना का नहीं है, बल्कि यह तटीय पारिस्थितिकी तंत्र और मानव आजीविका के बीच संतुलन का है। यदि परियोजना में बंगाल की खाड़ी की ज्वारीय गतिशीलता और समुद्री मौसम की चरम घटनाओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि सार्वजनिक निवेश के लिए भी एक बड़ा जोखिम बन सकता है।

पारिस्थितिक संतुलन को दरकिनार कर किया गया कोई भी विकास अंततः विनाशकारी साबित होता है।

पर्यावरणविदों का आरोप है कि आवश्यक अध्ययन पूरे होने से पहले ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बकिंघम नहर को अवरुद्ध करने जैसे कार्यों से दलदली पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंच रहा है, जिससे 12,000 से अधिक मछुआरे, जिनमें आदिवासी महिलाएं भी शामिल हैं, अपनी आजीविका खो सकते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चेन्नई के तटीय क्षेत्र में नेम्मली और कोवलम के नमक के दलदल (salt marshes) जैव विविधता के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं। पिछले कुछ दशकों में शहरीकरण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण इन संवेदनशील क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा है, जिससे स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र और पारंपरिक समुदायों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

क्या आप जानते हैं?: कोवलम-नेम्मली के दलदली क्षेत्र समुद्री जीवन और पक्षियों के प्रवास के लिए एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक गलियारा प्रदान करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: पर्यावरण समूह किस बात से चिंतित हैं?
उत्तर: समूह इस बात से चिंतित हैं कि परियोजना में समुद्री ज्वार और तटीय मौसम के प्रभावों का सही आकलन नहीं किया गया है, जिससे पारिस्थितिकी और आजीविका को खतरा है।

प्रश्न 2: समूहों की मुख्य मांग क्या है?
उत्तर: उनकी मुख्य मांग निर्माण कार्य को रोकना और एक स्वतंत्र पैनल बनाना है जिसमें तटवर्ती समुदायों के प्रतिनिधि और निष्पक्ष विशेषज्ञ शामिल हों।