संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि शक्तिशाली अल नीनो घटना वैश्विक मौसम पैटर्न को बिगाड़ देगी, जिससे भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने जीवाश्म ईंधन के उपयोग को तुरंत रोकने की मांग की है।
मुख्य बातें
- अल नीनो के कारण वैश्विक स्तर पर गर्मी, सूखा और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
- मध्य प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है।
- UN महासचिव ने नए कोयला, तेल और गैस प्रोजेक्ट्स पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है।
- अफ्रीका, यूरोप और दक्षिण एशिया में मौसम का भीषण संकट देखा जा रहा है।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने एक गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि तेजी से बढ़ता अल नीनो (El Nino) घटना आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम के मिजाज को पूरी तरह बदल देगी। यह प्राकृतिक घटना दुनिया भर में अत्यधिक गर्मी, सूखे और विनाशकारी बाढ़ की स्थिति पैदा कर सकती है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा, "अल नीनो केवल हमारे दरवाजे पर नहीं है, यह घर के अंदर है और गर्मी बढ़ा रहा है। यह तो बस एक शुरुआत है। अल नीनो मजबूत हो रहा है, जो पहले से ही आग की लपटों में घिरे ग्रह में घी डालने का काम कर रहा है।"
क्यों महत्वपूर्ण है यह खबर?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अल नीनो का प्रभाव केवल तापमान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह खाद्य सुरक्षा और जल संसाधनों के लिए एक वैश्विक खतरा है। जब अल नीनो मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के साथ मिलता है, तो यह विनाशकारी परिणामों को कई गुना बढ़ा देता है।
"पूर्वानुमान अपने आप में खतरों को नहीं रोकते; लोग उन्हें रोकते हैं। आज हम जो निर्णय लेंगे, वही कल के प्रभावों को तय करेंगे।" - सेलेस्ट साउलो, महासचिव, WMO
वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है। इससे न केवल तापमान में वृद्धि होगी, बल्कि मानसून और अन्य मौसमी चक्रों में भी भारी व्यवधान आएगा। वर्तमान में अफ्रीका और यूरोप में भीषण जंगलों की आग (Wildfires) और दक्षिण एशिया में मानसून की तबाही इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अल नीनो एक चक्रीय जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने से होती है। पिछले कुछ दशकों में, ग्लोबल वार्मिंग के कारण अल नीनो के प्रभाव अधिक तीव्र और अनिश्चित होते जा रहे हैं, जिससे प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति बढ़ गई है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. अल नीनो क्या है?
यह प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली वृद्धि है, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है।
2. इससे किन क्षेत्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा?
अफ्रीका, दक्षिणी यूरोप, भारतीय उपमहाद्वीप, पूर्वी एशिया और दक्षिण अमेरिका में सबसे तीव्र गर्मी देखी जा सकती है।