पश्चिमी घाट के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESA) को लेकर चल रही बहस संरक्षण और स्थानीय आजीविका के बीच एक जटिल संघर्ष को उजागर करती है। यह लेख विज्ञान और सामुदायिक संवाद के महत्व पर जोर देता है।

मुख्य बिंदु

  • पश्चिमी घाट यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है और जैव विविधता का वैश्विक हॉटस्पॉट है।
  • माधव गाडगिल और कस्तूरीरंगन पैनलों के बीच संरक्षण के तरीकों पर गहरा मतभेद रहा है।
  • स्थानीय समुदायों को कृषि, खनन और आजीविका पर पड़ने वाले प्रभाव का डर है।
  • सैटेलाइट इमेजिंग के बजाय ज़मीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन की मांग की जा रही है।

पश्चिमी घाट, जो भारत के छह तटीय राज्यों में फैला हुआ है, अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है। इसमें 39 जैव विविधता हॉटस्पॉट क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें राष्ट्रीय उद्यान, आरक्षित वन और वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं जिन्हें 2012 में यूनेस्को (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

संरक्षण का लंबा संघर्ष: गाडगिल से कस्तूरीरंगन तक

इस प्राकृतिक विरासत की रक्षा के लिए, 2010 में पारिस्थितिकी विज्ञानी माधव गाडगिल की अध्यक्षता में पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल (WGEEP) का गठन किया गया था। गाडगिल की रिपोर्ट ने 142 तालुकों को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र (ESA) घोषित करने की सिफारिश की थी। हालांकि, स्थानीय और राजनीतिक विरोध के बाद, केंद्र सरकार ने 2012 में कृष्णास्वामी कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कार्य समूह बनाया, जिसने इन प्रतिबंधों को कम करके केवल 37% क्षेत्र तक सीमित कर दिया।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि पश्चिमी घाट का मुद्दा केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का भी है। यदि संरक्षण के नियम बहुत सख्त होते हैं, तो कृषि, बागवानी और बुनियादी ढांचे का विकास बाधित हो सकता है।

'ESA में उन स्वदेशी समुदायों को शामिल किया जाना चाहिए जो वनों के भीतर रहते हैं, क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से संरक्षण सिद्धांतों का पालन करते हैं।'

कर्नाटक का मामला: कर्नाटक के 10 जिले पश्चिमी घाट में आते हैं, जहाँ राज्य की 23.4% आबादी निवास करती है। राज्य सरकार ने लगातार इस प्रस्ताव का विरोध किया है, क्योंकि इसका असर खेती, बागान और खनन पर पड़ सकता है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से क्षेत्रों की पहचान करना गलत है, क्योंकि यह कॉफी, रबर और नारियल के बागानों और वास्तविक वन क्षेत्र के बीच अंतर नहीं कर पाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

2015 से 2026 के बीच, केंद्र और राज्यों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण पांच अलग-अलग ड्राफ्ट अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। वर्तमान में, विशेषज्ञों के पैनल का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है ताकि सभी हितधारकों की चिंताओं का समाधान किया जा सके।

क्या आप जानते हैं?: पश्चिमी घाट को 'दुनिया के आठ सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता हॉटस्पॉट' में से एक माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. ESA का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है 'पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र', जहाँ पर्यावरण की रक्षा के लिए मानवीय गतिविधियों को विनियमित किया जाता है।

2. स्थानीय समुदायों को क्या डर है?
मुख्य डर भूमि से बेदखली, वन अधिकारों की कमी और पारंपरिक कृषि पद्धतियों पर प्रतिबंध का है।