एरोड के वीईटी संस्थान के 120 छात्रों ने 'कचरे से आजादी' अभियान के तहत अवलपूँदुरई झील की सफाई की। इस दौरान उन्होंने एक जाल में फंसे कॉर्मोरेंट पक्षी को भी सुरक्षित मुक्त कराया।
मुख्य बातें
- वीईटी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स एंड साइंस के 120 छात्रों ने स्वच्छता अभियान चलाया।
- 'फ्रीडम फ्रॉम ट्रैश' पहल के तहत जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।
- एक कॉर्मोरेंट पक्षी को फेंके गए मछली पकड़ने वाले जाल से सुरक्षित निकाला गया।
तमिलनाडु के एरोड जिले में पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। वीईटी इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स एंड साइंस के लगभग 120 छात्र गुरुवार को अवलपूँदुरई झील में सफाई अभियान चलाने के लिए एकजुट हुए। यह पहल स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एन्वायरमेंटलिस्ट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (EFI) के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी।
इस अभियान का शीर्षक 'फ्रीडम फ्रॉम ट्रैश' (कचरे से आजादी) रखा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के बीच आर्द्रभूमि संरक्षण (wetland conservation), जैव विविधता और नागरिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता पैदा करना था। सफाई के दौरान एक भावुक क्षण तब आया जब छात्रों ने देखा कि एक कॉर्मोरेंट (Cormorant) पक्षी फेंके गए मछली पकड़ने के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है। छात्रों ने तत्परता दिखाते हुए पक्षी को जाल से मुक्त किया और उसे सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में जल निकायों का स्वास्थ्य सीधे तौर पर स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। अवलपूँदुरई झील, जिसे लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर और कुरंगन ओडाई नहर से पानी मिलता है, भूजल पुनर्भरण और जल भंडारण के लिए महत्वपूर्ण है।
प्लास्टिक और छोड़े गए मछली पकड़ने के जाल न केवल पानी को प्रदूषित करते हैं, बल्कि स्थानीय वन्यजीवों के लिए घातक जाल बन जाते हैं।
यह कार्यक्रम इस बात पर भी प्रकाश डालता है कि कैसे छोड़े गए प्लास्टिक और कचरे से जलीय जीवन और पक्षियों को गंभीर खतरा हो रहा है। ईएफआई (EFI) द्वारा इस झील के बहाली के प्रयास पहले से ही जारी हैं, लेकिन सामुदायिक भागीदारी ही इसे लंबे समय तक जीवित रख सकती है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
अवलपूँदुरई झील जैसे जल निकाय सदियों से स्थानीय कृषि और पारिस्थितिकी तंत्र का आधार रहे हैं। हालांकि, बढ़ते शहरीकरण और कचरे के प्रबंधन में कमी के कारण इन प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण हुआ है, जिसे अब युवा पीढ़ी पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: यह सफाई अभियान किसके सहयोग से आयोजित किया गया था?
उत्तर: यह अभियान वीईटी संस्थान द्वारा एन्वायरमेंटलिस्ट फाउंडेशन ऑफ इंडिया (EFI) के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया था।
प्रश्न 2: अवलपूँदुरई झील को पानी किन स्रोतों से मिलता है?
उत्तर: इस झील को लोअर भवानी प्रोजेक्ट नहर और कुरंगन ओडाई नहर से पानी प्राप्त होता है।