पर्यावरण समूह मामल्लान जलाशय परियोजना के खिलाफ डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकिंग और जैव विविधता दस्तावेजीकरण के माध्यम से जागरूकता फैला रहे हैं। यह परियोजना कोवलम-नेम्मली आर्द्रभूमि के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को हमेशा के लिए बदल सकती है।

मुख्य बिंदु

  • मामल्लान जलाशय परियोजना 8,500 एकड़ की कोवलम-नेम्मली आर्द्रभूमि को प्रभावित कर सकती है।
  • पर्यावरण समूह डॉक्यूमेंट्री और किताबों के जरिए इस पारिस्थितिकी तंत्र के विनाश को रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
  • आर्द्रभूमि में 232 प्रजातियां और 45,000 से अधिक प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए हैं।
  • परियोजना से 16 गांवों के 7,000 मछुआरा परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है।

चेन्नई के पास स्थित कोवलम-नेम्मली आर्द्रभूमि, जो लगभग 8,500 एकड़ में फैली है, वर्तमान में एक बड़े पारिस्थितिक संकट का सामना कर रही है। प्रस्तावित मामल्लान जलाशय परियोजना इस जटिल तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को एक मीठे पानी के जलाशय में बदलने की योजना बना रही है, जिससे यहाँ के खारे पानी के आवास और जैव विविधता को अपूरणीय क्षति हो सकती है।

दस्तावेजीकरण: संरक्षण का नया हथियार

पर्यावरण समूहों और प्रकृतिवादियों ने इस खतरे के खिलाफ 'दस्तावेजीकरण' को एक हथियार के रूप में अपनाया है। सुझल अरीवोम द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री 'नेम्मली का अंतिम ज्वार' (Nemmeli’s Last Tide) वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और मछुआरों की आवाजों को एक साथ लाती है। इसका उद्देश्य लोगों को उस परिदृश्य से जोड़ना है जिसे वे शायद ही कभी देखते हैं।

पल्लुयिर ट्रस्ट ने भी इस लड़ाई में योगदान दिया है, जिसने 'कोवलम-नेम्मली तटीय आर्द्रभूमि: एक जैव विविधता मोंटाज' नामक एक कॉफी-टेबल बुक प्रकाशित की है। इस पुस्तक को सीधे सरकारी अधिकारियों और विधायकों को भेजा गया है ताकि उन्हें इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व से अवगत कराया जा सके।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि पारिस्थितिक तंत्र का विनाश केवल प्रकृति का नुकसान नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और अर्थव्यवस्था पर भी सीधा प्रहार है। यह आर्द्रभूमि सेंट्रल एशियन फ्लाईवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहाँ हर साल हजारों प्रवासी पक्षी आते हैं।

परिदृश्य में इतनी जान है। यह एक बहुत ही जटिल और जटिल पारिस्थितिकी तंत्र है। एक बार नष्ट होने के बाद इसे किसी भी कीमत पर पुन: निर्मित नहीं किया जा सकता।

आर्द्रभूमि में दर्ज किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 2025-26 के पीक सीजन के दौरान, यहाँ लगभग 45,000 पक्षी और 16,000 प्रवासी बत्तखें देखी गईं। इसके अलावा, यहाँ बर्मन का सनड्यू (Burmann’s Sundew) जैसे दुर्लभ मांसाहारी पौधे भी पाए गए हैं, जो स्वच्छ आर्द्रभूमि के संकेतक हैं।

क्या आप जानते हैं?: नेम्मली आर्द्रभूमि में 232 विभिन्न प्रजातियां पाई गई हैं, जो इसे जैव विविधता का एक हॉटस्पॉट बनाती हैं।

प्रोजेक्ट बनाम प्रकृति: एक तुलना

विशेषतावर्तमान आर्द्रभूमि स्थितिप्रस्तावित जलाशय परियोजना
पानी का प्रकारखारा और मीठा (मिश्रित)मुख्यतः मीठा पानी
मुख्य जीवप्रवासी पक्षी, झींगा, केकड़ेसीमित जलीय प्रजातियां
आजीविका7,000 मछुआरा परिवारअनिश्चित और जोखिम भरी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मामल्लान जलाशय परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य क्षेत्र में मीठे पानी के भंडारण के लिए एक जलाशय बनाना है।

प्रश्न 2: इस परियोजना से स्थानीय लोगों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: इससे 16 गांवों के मछुआरा समुदायों की पारंपरिक आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।