आंध्र प्रदेश राज्य जलवायु परिवर्तन सेल (APSCCC) ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे को बचाने के लिए आठ प्रमुख अनुकूलन उपायों की सिफारिश की है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बढ़ते तापमान और चरम मौसम से राज्य के ऊर्जा उत्पादन और वितरण पर गंभीर खतरा हो सकता है।

मुख्य बातें

  • नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) को कुल ऊर्जा मिश्रण का 40% तक बढ़ाने का लक्ष्य।
  • 120 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना का प्रस्ताव।
  • तटीय क्षेत्रों और उत्तरी/मध्य आंध्र में ऊर्जा बुनियादी ढांचे के लिए उच्च जोखिम की चेतावनी।
  • दो पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रोजन हब बनाने की योजना।

आंध्र प्रदेश राज्य जलवायु परिवर्तन सेल (APSCCC) ने राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाने के लिए 'राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना 2025-30' (SAPCC) के तहत आठ महत्वपूर्ण अनुकूलन उपायों का प्रस्ताव दिया है। विभाग का कहना है कि बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और समुद्र के बढ़ते स्तर से विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में स्थित बिजली संयंत्रों को भारी नुकसान हो सकता है।

क्षेत्रीय संवेदनशीलता का विश्लेषण

वल्नरेबिलिटी असेसमेंट (Vulnerability Assessment) के अनुसार, आंध्र प्रदेश के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों का ऊर्जा क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील पाया गया है। इसके विपरीत, दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में जोखिम अपेक्षाकृत कम है। सेल ने चेतावनी दी है कि चरम मौसम की घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति से न केवल ऊर्जा उत्पादन बल्कि बिजली के संचरण (Transmission) और वितरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ऊर्जा क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल बिजली की कमी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ाकर ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जन को भी खतरनाक स्तर तक बढ़ा सकता है। यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बुनियादी ढांचे की विफलता से राज्य की आर्थिक स्थिरता को खतरा हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक लचीलेपन के लिए एक सीधा खतरा है।

प्रस्तावित उपायों में सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक लाख इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना शामिल है। इसके अलावा, मौजूदा इमारतों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के लिए रेट्रोफिटिंग और कुशल कूलिंग सिस्टम के बाजार विस्तार पर भी जोर दिया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

आंध्र प्रदेश लंबे समय से अपनी तटीय स्थिति के कारण चक्रवात और समुद्र के बढ़ते स्तर जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा रहा है। जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, राज्य को अपनी ऊर्जा रणनीति को पारंपरिक कोयला आधारित बिजली से हटाकर स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोतों की ओर ले जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

क्या आप जानते हैं?: आंध्र प्रदेश का लक्ष्य सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करना है ताकि कार्बन फुटप्रिंट को कम किया जा सके।

Frequently Asked Questions

1. किन क्षेत्रों में ऊर्जा संकट का सबसे अधिक खतरा है?
रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश के उत्तरी और मध्य क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील हैं, जबकि तटीय क्षेत्रों में बिजली संयंत्रों को जोखिम है।

2. APSCCC के मुख्य सुझाव क्या हैं?
मुख्य सुझावों में 120 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, हाइड्रोजन हब का निर्माण और EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार शामिल है।