वैज्ञानिकों ने उत्तरी ओंटारियो की खदानों में अरबों साल पुराने हाइड्रोजन के भंडार खोजे हैं। यह 'जियोलॉजिक हाइड्रोजन' दुनिया के लिए शून्य-कार्बन ऊर्जा का एक क्रांतिकारी स्रोत साबित हो सकता है।
- उत्तरी ओंटारियो की किड क्रीक खदान में प्राकृतिक हाइड्रोजन के निरंतर प्रवाह की पुष्टि हुई है।
- पृथ्वी की पपड़ी में ट्रिलियन टन हाइड्रोजन होने का अनुमान है, जो सदियों तक वैश्विक मांग पूरी कर सकता है।
- ओमान और अल्बानिया जैसे देशों में भी प्राकृतिक हाइड्रोजन के संकेत मिले हैं।
- चुनौती अब इसे व्यावसायिक स्तर पर किफायती तरीके से निकालने की है।
1990 के दशक में, बारबरा शेरवुड लोलर और उनकी टीम ने उत्तरी ओंटारियो की किड क्रीक खदान की गहराई में एक ऐसी खोज की जिसने विज्ञान जगत को चौंका दिया। तीन किलोमीटर से अधिक गहराई पर, उन्हें ऐसा पानी मिला जो अरबों वर्षों से जमीन के नीचे कैद था। इस प्राचीन खारे पानी में ऐसे सूक्ष्मजीव पाए गए जो चट्टानों और पानी के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से उत्पन्न हाइड्रोजन पर जीवित थे।
दशकों बाद, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो की भू-रसायन शास्त्री शेरवुड लोलर ने इस डेटा का पुनर्मूल्यांकन किया। उनका उद्देश्य यह पता लगाना था कि क्या यह गैस शून्य-कार्बन ईंधन के रूप में उपयोग किए जाने के लिए पर्याप्त है। वर्तमान में, हाइड्रोजन का उत्पादन महंगा है और इसमें भारी मात्रा में ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है, लेकिन 'जियोलॉजिक हाइड्रोजन' या प्राकृतिक रूप से मौजूद हाइड्रोजन इस समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the shift from 'produced hydrogen' to 'extracted hydrogen' could decouple clean energy from high electricity costs. If natural reservoirs are tapped, hydrogen could transition from a niche industrial gas to a primary global energy commodity, drastically reducing the carbon footprint of heavy industries.
इस खोज ने दुनिया भर में एक नई दौड़ शुरू कर दी है। HyTerra और बिल गेट्स समर्थित Koloma जैसी स्टार्टअप कंपनियां अमेरिका के मिडवेस्ट में प्राचीन समुद्री चट्टानों की तलाश कर रही हैं। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे का अनुमान है कि पृथ्वी की पपड़ी में ट्रिलियन टन हाइड्रोजन मौजूद है। यदि इसका एक छोटा हिस्सा भी निकाला जा सके, तो यह सदियों तक दुनिया की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकता है।
"चुनौती अब यह साबित करना नहीं है कि प्राकृतिक हाइड्रोजन मौजूद है, बल्कि यह साबित करना है कि इसे व्यावसायिक पैमाने पर आर्थिक रूप से उत्पादित किया जा सकता है।"
किड क्रीक खदान के आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 140 मीट्रिक टन हाइड्रोजन बिना उपयोग के बाहर निकल रही है। हालांकि यह मात्रा वैश्विक स्तर पर बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह एक स्थानीय प्रमाण है कि प्राकृतिक हाइड्रोजन का उपयोग संभव है। इसी तरह, अल्बानिया की बुलकिज़े क्रोमियम खदान में भी प्रति वर्ष 200 मीट्रिक टन गैस के प्रवाह की रिपोर्ट मिली है।
वैज्ञानिक अब 'उत्तेजित उत्पादन' (Stimulated Production) पर भी काम कर रहे हैं, जिसमें चट्टानों में पानी, गर्मी या उत्प्रेरक डालकर हाइड्रोजन उत्पादन की गति बढ़ाई जाती है। ओमान के पहाड़ों में किए गए एक प्रयोग में, एक किलोमीटर गहरे बोरहोल में पानी डालने के बाद 90% शुद्ध हाइड्रोजन गैस का रिसाव देखा गया, जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
| विशेषता | पारंपरिक हाइड्रोजन (Green/Blue) | जियोलॉजिक हाइड्रोजन (White) |
|---|---|---|
| उत्पादन विधि | इलेक्ट्रोलेसिस या स्टीम रिफॉर्मिंग | प्राकृतिक भूगर्भीय प्रतिक्रियाएं |
| लागत | अत्यधिक उच्च | संभावित रूप से बहुत कम |
| कार्बन उत्सर्जन | प्रक्रिया पर निर्भर (मध्यम से शून्य) | न्यूनतम/शून्य |
Frequently Asked Questions
1. जियोलॉजिक हाइड्रोजन क्या है?
यह वह हाइड्रोजन है जो पृथ्वी की गहराई में पानी और लोहे से भरपूर चट्टानों के बीच रासायनिक प्रतिक्रियाओं या रेडियोधर्मी क्षय के कारण स्वाभाविक रूप से उत्पन्न होता है।
यदि इसे व्यावसायिक स्तर पर किफायती ढंग से निकाला गया, तो यह निश्चित रूप से एक स्वच्छ और शक्तिशाली विकल्प बन सकता है।