तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (TUDA) ने महत्वाकांक्षी 'सिटी ऑफ लेक्स' परियोजना के तहत जर्मनी के KfW बैंक के प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न जलाशयों का दौरा किया। इस परियोजना का उद्देश्य बाढ़ के प्रभाव को कम करना, जल सुरक्षा को मजबूत करना और तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच जल निकायों का पुनरुद्धार करना है।
- टूडा (TUDA) और जर्मन बैंक KfW तिरुपति को 'झीलों के शहर' में बदलने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।
- इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के खतरों को कम करना और पारंपरिक श्रृंखला जलाशयों (Chain Tanks) को मजबूत करना है।
- परियोजना के पहले चरण के तहत अवीलाला (Avilala) और पेरूड़ू (Peruru) तालाबों को आपस में जोड़ने का काम शुरू हो चुका है।
आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक शहर तिरुपति को एक स्थायी और बाढ़-सुरक्षित शहर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। तिरुपति शहरी विकास प्राधिकरण (TUDA) की एक उच्च स्तरीय टीम ने जर्मनी के प्रतिनिधिमंडल को शहर के विभिन्न जल निकायों का दौरा कराया। यह दौरा तिरुपति को पर्यावरण के अनुकूल और जल-लचीला शहर बनाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी 'सिटी ऑफ लेक्स' (City of Lakes) परियोजना का हिस्सा था।
इस संयुक्त निरीक्षण दल का नेतृत्व टूडा के अध्यक्ष सी. दिवाकर रेड्डी और उपाध्यक्ष आर. गोविंद राव ने किया। इस दल में 'इंटरनेशनल काउंसिल फॉर लोकल एनवायरनमेंटल इनिशिएटिव्स' (ICLEI) के अधिकारी, वरिष्ठ इंजीनियर नॉर्बर्ट गेयर और केएफडब्ल्यू (KfW) फ्रैंकफर्ट के प्रिंसिपल पोर्टफोलियो मैनेजर रेनर सुएनेन शामिल थे। इस अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उद्देश्य तिरुपति के जल संसाधनों को आधुनिक तकनीक और वैश्विक मानकों के अनुसार पुनर्जीवित करना है।
मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने की पहल
टूडा के अध्यक्ष सी. दिवाकर रेड्डी ने इस सहयोग को एक ऐतिहासिक अवसर बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के तिरुपति को एक वैश्विक स्तर के हरित और स्मार्ट शहर के रूप में विकसित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है। भविष्य में होने वाले तीव्र शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए, पारंपरिक श्रृंखला तालाबों (Chain Tanks) को सुदृढ़ करना बेहद आवश्यक है ताकि मानसून के दौरान बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके और भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।
परियोजना की प्रगति के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि टूडा पहले ही अवीलाला तालाब पर काम शुरू करके और पेरूड़ू तालाब के साथ इसकी कनेक्टिविटी स्थापित करके इस दिशा में मार्ग प्रशस्त कर चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित गतिविधियां अक्टूबर 2026 तक पूरी तरह से शुरू हो जाएंगी और सर्वोत्तम परिणाम सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध तरीका अपनाया जाएगा।
| पैरामीटर | वर्तमान चुनौतियां | प्रस्तावित 'सिटी ऑफ लेक्स' समाधान |
|---|---|---|
| बाढ़ नियंत्रण | कमजोर श्रृंखला तालाबों के कारण अचानक आने वाली बाढ़ का खतरा। | अवीलाला और पेरूड़ू जैसे प्रमुख तालाबों का सुदृढ़ीकरण और इंटरकनेक्टिविटी। |
| जल की गुणवत्ता | सीवेज और अनुपचारित अपशिष्ट जल के सीधे मिलने से प्रदूषण। | आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और डायवर्जन सिस्टम का निर्माण। |
| शहरीकरण का प्रभाव | प्राकृतिक जल निकायों का अतिक्रमण और घटता जल स्तर। | चरणबद्ध तरीके से जलाशयों का सौंदर्यीकरण और बफर जोन का विकास। |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन और अनियोजित शहरीकरण के कारण तिरुपति जैसे तेजी से बढ़ते शहरों में बाढ़ और जल संकट का खतरा बढ़ गया है। जर्मनी के KfW बैंक जैसी वैश्विक संस्था से वित्तीय और तकनीकी सहायता प्राप्त होना न केवल परियोजना की विश्वसनीयता को बढ़ाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि स्थानीय जल निकायों का संरक्षण अब वैश्विक जलवायु अनुकूलन रणनीतियों का हिस्सा बन चुका है।
तिरुपति की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, इसके पारंपरिक तालाबों को आपस में जोड़ना बाढ़ नियंत्रण और जल संचयन दोनों के लिए एक अचूक उपाय साबित होगा।
टूडा के उपाध्यक्ष आर. गोविंद राव ने इस परियोजना को शहर के लिए 'उच्च प्राथमिकता वाली पहल' बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने वित्तीय बाधाओं के बावजूद इस परियोजना के लिए ऋण प्राप्त करने की विशेष मंजूरी दी है। टूडा जलाशयों में सीवेज के बहाव को रोकने और जल प्रदूषण को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: 'सिटी ऑफ लेक्स' परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य तिरुपति के पारंपरिक तालाबों को आपस में जोड़कर बाढ़ के खतरे को कम करना, जल गुणवत्ता में सुधार करना और शहर की जल सुरक्षा को मजबूत करना है।
प्रश्न 2: इस परियोजना में जर्मन संस्था KfW की क्या भूमिका है?
उत्तर: जर्मन विकास बैंक KfW इस परियोजना के लिए तकनीकी विशेषज्ञता और वित्तीय सहायता (ऋण) प्रदान कर रहा है ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार जलाशयों का विकास किया जा सके।