कोझिकोड के न्जेलियानपारम्बा में दशकों पुराने 'लिगेसी वेस्ट' को हटाने के लिए बायोमाइनिंग का काम तेजी से चल रहा है। इस परियोजना का लक्ष्य 2027 तक पूरी जमीन को पुनर्जीवित करना और वहां बायो गैस प्लांट स्थापित करना है।
- न्जेलियानपारम्बा डंपसाइट से 2.33 लाख घन मीटर कचरा साफ किया जाएगा।
- जुलाई 2027 तक 12.6 एकड़ जमीन को उपयोग के योग्य बनाने का लक्ष्य है।
- BPCL वहां एक कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करेगा।
- 7 एकड़ जमीन ऊर्जा उत्पादन के लिए और 4.5 एकड़ पार्क के लिए इस्तेमाल होगी।
कोझिकोड नगर निगम के मेयर ओ. सदाशिवन ने घोषणा की है कि न्जेलियानपारम्बा में दशकों पुराने 'लिगेसी वेस्ट' के ढेर को साफ करने के लिए चल रही बायोमाइनिंग प्रक्रिया स्थिर गति से आगे बढ़ रही है। यह परियोजना क्षेत्र के निवासियों के लिए लंबे समय से एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बनी हुई थी।
मंगलवार को आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में, बायोमाइनिंग और कचरे के वैज्ञानिक निपटान की प्रगति की समीक्षा की गई। मार्च 2026 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य 12.6 एकड़ के डंपसाइट पर जमा लगभग 2.33 लाख घन मीटर कचरे को पूरी तरह से हटाना है। प्रशासन का लक्ष्य जुलाई 2027 तक पूरी भूमि को उत्पादक उपयोग के लिए वापस प्राप्त करना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल कचरा प्रबंधन का मामला नहीं है, बल्कि यह शहरी पुनरुद्धार का एक मॉडल है। कचरे के निपटान के बाद, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) साइट पर एक कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट स्थापित करेगा। इससे कोझिकोड शहर में उत्पन्न होने वाले जैविक कचरे का पूर्ण उपचार संभव हो सकेगा, जिससे शहर की अपशिष्ट प्रबंधन समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा।
बायोमाइनिंग न केवल भूमि को मुक्त करती है, बल्कि यह मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद करती है।
चेन्नई स्थित Zigma Global Environ Solutions Private Limited इस परियोजना का निष्पादन कर रही है। डिप्टी मेयर एस. जयश्री ने बताया कि अब तक लगभग 2.5 एकड़ भूमि को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया जा चुका है और 20,000 घन मीटर से अधिक कचरे का उपचार किया जा चुका है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
न्जेलियानपारम्बा डंपसाइट वर्षों से कोझिकोड के लिए एक चुनौती रहा है। कचरे के जमाव के कारण स्थानीय निवासियों को दुर्गंध और दूषित जल (leachate) जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। केरल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन परियोजना (KSWMP) के तहत इस वैज्ञानिक उपचार प्रक्रिया को शुरू किया गया है ताकि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: इस परियोजना के पूरा होने की अपेक्षित तिथि क्या है?
उत्तर: परियोजना के जुलाई 2027 तक पूरी तरह से संपन्न होने की उम्मीद है।
प्रश्न 2: reclaimed जमीन का उपयोग कैसे किया जाएगा?
उत्तर: 7 एकड़ जमीन BPCL के बायोगैस प्लांट के लिए और शेष 4.5 एकड़ एक पार्क के रूप में विकसित की जाएगी।