सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें फसलों की सुरक्षा के नाम पर हाथियों के पारंपरिक रास्तों में बाधाएं उत्पन्न नहीं कर सकतीं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी खनन और अन्य परियोजनाओं के कारण हाथी आवासों के व्यवस्थित विनाश पर चिंता व्यक्त की है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों के गलियारों में किसी भी प्रकार की बाधा या अवरोध खड़ा करने को अस्वीकार्य बताया है।
  • केंद्र सरकार को पूरे देश में हाथी गलियारों का सर्वेक्षण करने और रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
  • हाथियों को भगाने के लिए आग के गोले या मशालों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
  • जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि खनन परियोजनाओं के कारण हाथी आवासों को व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि राज्य सरकारें फसल नुकसान और आजीविका की रक्षा के बहाने हाथियों के पारंपरिक रास्तों में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं कर सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हाथी लंबी दूरी तय करने के आदी होते हैं और उनके प्राकृतिक मार्गों को रोकना वन्यजीवों के अधिकार का उल्लंघन है।

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के महासचिव और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि हाथी आवासों और गलियारों को खनन और अन्य विकास परियोजनाओं द्वारा व्यवस्थित रूप से नष्ट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण तो मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण की इच्छाशक्ति का अभाव है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, हाथियों के गलियारों का बाधित होना न केवल वन्यजीवों के लिए खतरा है, बल्कि यह मानव-हाथी संघर्ष को भी बढ़ाता है। जब प्राकृतिक मार्ग बंद कर दिए जाते हैं, तो हाथी बस्तियों की ओर रुख करते हैं, जिससे जान-माल का नुकसान होता है।

हाथियों के गलियारों को सुरक्षित रखना केवल एक पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति बागची ने पश्चिम बंगाल की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नेपाल से आने वाले हाथी पश्चिम बंगाल से होते हुए झारखंड और अन्य राज्यों में जाते हैं। ऐसे में, स्थानीय स्तर पर बाधाएं उत्पन्न करना एक बड़ी समस्या बन गया है। अदालत ने केंद्र सरकार को छह सप्ताह के भीतर एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिसमें यह जांचा जाएगा कि किन राज्यों ने हाथियों के रास्तों में अवरोध पैदा किए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में हाथी संरक्षण के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कड़े प्रावधान हैं। ऐतिहासिक रूप से, हाथी गलियारे विभिन्न राज्यों के बीच जैविक सेतु का काम करते रहे हैं, लेकिन शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार ने इन महत्वपूर्ण मार्गों को खंडित कर दिया है।

Did You Know?: हाथी एक अत्यंत बुद्धिमान सामाजिक प्राणी हैं जो अपने पूर्वजों द्वारा उपयोग किए जाने वाले रास्तों को पीढ़ियों तक याद रखते हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या राज्य सरकारें फसलों की सुरक्षा के लिए हाथी गलियारों को बंद कर सकती हैं?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, फसल नुकसान के आधार पर हाथियों के पारंपरिक रास्तों में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है।

2. हाथियों को भगाने के लिए किन तरीकों पर प्रतिबंध लगा है?
अदालत ने हाथियों को भगाने के लिए आग के गोले (fireballs) या मशालों (mashaals) के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है।