सुप्रीम कोर्ट ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026 को सख्ती से लागू करने का आदेश दिया है। नियमों का पालन न करने वाले बड़े कचरा उत्पादकों, जैसे मॉल और अस्पतालों की बिजली और पानी की आपूर्ति काटने के निर्देश दिए गए हैं।

  • सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम 2026 को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है।
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले बड़े कचरा उत्पादकों (मॉल, अस्पताल, होटल) की बिजली और पानी की आपूर्ति काटी जा सकती है।
  • जिला कलेक्टरों को 6 सप्ताह के भीतर बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करने और दंडात्मक कार्रवाई करने के लिए सशक्त बनाया गया है।
  • कचरे को चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य है: गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरा।

नई दिल्ली: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियमों, 2026 के सख्त कार्यान्वयन के लिए एक ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ ने स्पष्ट किया है कि कचरा प्रबंधन केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह कचरा उत्पन्न करने वाले प्रत्येक संस्थान और व्यक्ति का संवैधानिक कर्तव्य है।

बड़ी संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई

अदालत ने विशेष रूप से उन संस्थाओं को लक्षित किया है जिन्हें 'बल्क वेस्ट जनरेटर' (BWG) के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें बड़े मॉल, अस्पताल, होटल, वाणिज्यिक परिसर और बड़ी आवासीय सोसायटियां शामिल हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि यदि ये संस्थान कचरे का उचित प्रबंधन और पृथक्करण करने में विफल रहते हैं, तो स्थानीय अधिकारियों को उनकी बिजली और पानी की आपूर्ति काटने का अधिकार होगा।

बोज़ोक मीडिया विश्लेषण (BozokMedia analysis shows...)

बोज़ोक मीडिया का विश्लेषण दर्शाता है कि यह फैसला भारत के शहरी बुनियादी ढांचे में एक बड़े बदलाव का संकेत है। अब तक, कचरा प्रबंधन को एक 'अदृश्य सेवा' माना जाता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस कदम ने इसे सीधे तौर पर व्यावसायिक निरंतरता और नागरिक उत्तरदायित्व से जोड़ दिया है। यह निर्णय नगर निकायों पर दबाव डालेगा कि वे केवल कचरा उठाने के बजाय प्रबंधन प्रणालियों का ऑडिट करें।

कचरा प्रबंधन अब केवल एक स्वच्छता मुद्दा नहीं, बल्कि कानूनी अनुपालन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है।

कोर्ट ने जिला कलेक्टरों को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत विशेष शक्तियां देने का निर्देश दिया है ताकि वे नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ त्वरित दंडात्मक कार्रवाई कर सकें। कलेक्टरों को छह सप्ताह के भीतर अपने अधिकार क्षेत्र में सभी बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान करनी होगी।

कचरे का अनिवार्य वर्गीकरण

नए नियमों के तहत, कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में विभाजित करना अनिवार्य होगा:

  • गीला कचरा (Wet Waste)
  • सूखा कचरा (Dry Waste)
  • सैनिटरी कचरा (Sanitary Waste)
  • विशेष देखभाल या घरेलू खतरनाक कचरा (Hazardous Waste)

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर खेद जताया कि समाज में यह भावना व्याप्त है कि 'हमें कचरा उत्पन्न करने का अधिकार है, लेकिन उसके प्रबंधन में सहयोग करने की कोई जिम्मेदारी नहीं है।' अदालत ने इसे 'संवैधानिक रूप से अनैतिक' करार दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

यह मामला भोपाल नगर निगम द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों को चुनौती देने से शुरू हुआ था। हालांकि, मामले की गंभीरता और कचरे की बढ़ती जटिलता (ई-कचरा, निर्माण कचरा आदि) को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया।

क्या आप जानते हैं?: 'बल्क वेस्ट जनरेटर' वे संस्थान हैं जो प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करते हैं या जिनका निर्माण क्षेत्र 20,000 वर्ग मीटर से अधिक है।

Frequently Asked Questions

1. किन संस्थानों को 'बल्क वेस्ट जनरेटर' माना जाएगा?
वे संस्थान जो प्रतिदिन 100 किलो से अधिक कचरा पैदा करते हैं, 20,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैले हैं, या प्रतिदिन 40,000 लीटर से अधिक पानी का उपयोग करते हैं।

2. नियम न मानने पर क्या सजा हो सकती है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, बिजली और पानी की आपूर्ति का अस्थायी विच्छेदन (disconnection) किया जा सकता है।