असम के उडालगुड़ी जिले में हाथियों के प्राकृतिक आवास को बचाने के लिए एक अनूठी परियोजना शुरू की गई है, जिसमें आक्रामक पौधों को बायोचार में बदलकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाई जाएगी।
- उडालगुड़ी के खालिंगदुआर रिजर्व फॉरेस्ट में दो हेक्टेयर क्षेत्र को परियोजना के लिए चुना गया है।
- आक्रामक प्रजातियों (Lantana camara, Chromolaena odorata, Mikania micrantha) को हटाकर बायोचार बनाया जाएगा।
- अंतरराष्ट्रीय एलीफेंट फाउंडेशन द्वारा समर्थित इस परियोजना का उद्देश्य स्थानीय वनस्पतियों को पुनर्जीवित करना है।
असम के उडालगुड़ी जिले में स्थित खालिंगदुआर रिजर्व फॉरेस्ट में हाथियों के जीवन को सुरक्षित करने के लिए एक क्रांतिकारी पहल शुरू की गई है। वन विभाग और जैव विविधता संरक्षण संगठन 'आरण्यक' (Aaranyak) मिलकर एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं जो वन क्षेत्र में फैल रही आक्रामक विदेशी प्रजातियों (IAPs) को एक बेशकीमती संसाधन में बदल देगी।
दशकों से, असम वन विभाग के अधिकारी कम से कम आधा दर्जन ऐसी आक्रामक प्रजातियों से जूझ रहे हैं जो स्थानीय वनस्पतियों को दबा रही हैं और शाकाहारी जीवों, विशेष रूप से हाथियों के लिए भोजन के विकल्पों को सीमित कर रही हैं। इस परियोजना के तहत, बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) के एक महत्वपूर्ण हिस्से में तीन मुख्य आक्रामक प्रजातियों—लैंटाना कैमारा, क्रोमोलेना ओडोराटा, और मिकानिया माइक्रान्था—के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
बायोचार: एक वरदान
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता 'बायोचार' का उपयोग है। बायोचार एक छिद्रपूर्ण, चारकोल जैसी सामग्री है जिसे ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जैविक कचरे को गर्म करके बनाया जाता है। यह प्रक्रिया जैविक कचरे को एक स्थिर कार्बन रूप में बदल देती है जो मिट्टी में हजारों वर्षों तक रह सकता है। जब इन आक्रामक पौधों को हटाकर बायोचार बनाया जाएगा, तो यह मिट्टी की जल धारण क्षमता और पोषक तत्वों को बनाए रखने में मदद करेगा, जिससे स्थानीय घास और पेड़ों का पुनर्जन्म आसान हो जाएगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह परियोजना केवल वन प्रबंधन के बारे में नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने का एक मॉडल है। आक्रामक प्रजातियां न केवल स्थानीय पौधों को मारती हैं, बल्कि वे पूरे खाद्य चक्र को बाधित करती हैं। बायोचार का उपयोग करके, हम कचरे को एक ऐसे उपकरण में बदल रहे हैं जो मिट्टी को जीवित करता है और हाथी जैसे बड़े स्तनधारियों के लिए स्थायी भोजन सुनिश्चित करता है।
खालिंगदुआर परियोजना आक्रामक प्रजातियों के प्रबंधन के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। — सोनाली घोष, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक।
आरण्यक की टीम द्वारा किए जा रहे इस कार्य में मैन्युअल रूप से पौधों को उखाड़ना और फिर सीड-बॉल (seed-ball) तकनीक के माध्यम से स्थानीय वनस्पतियों का पुनरुद्धार करना शामिल है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आक्रामक प्रजातियां दोबारा हावी न हों, जिससे एक स्वस्थ और विविध वन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सके।
Frequently Asked Questions
1. आक्रामक प्रजातियां हाथियों के लिए खतरा क्यों हैं?
ये प्रजातियां स्थानीय घास और पौधों को बढ़ने नहीं देतीं, जिससे हाथियों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता।
2. बायोचार क्या है?
यह जैविक कचरे से बना एक प्रकार का चारकोल है जो मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता को बढ़ाता है।