हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरों में शहरी झीलें रियल एस्टेट के लालच में खत्म हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सौंदर्यीकरण काफी नहीं है, बल्कि जल निकायों के पारिस्थितिक तंत्र को बचाना अनिवार्य है।

  • शहरीकरण के कारण भारत के प्रमुख शहरों में झीलें तेजी से सिमट रही हैं।
  • रियल एस्टेट की बढ़ती कीमतों ने जल निकायों को अतिक्रमण का शिकार बना दिया है।
  • केवल सौंदर्यीकरण (lighting/fencing) के बजाय जल प्रवाह और पारिस्थितिकी पर ध्यान देना जरूरी है।
  • HYDRAA जैसी संस्थाएं अतिक्रमण हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

दुनिया भर में, शहरी झीलें और आर्द्रभूमि (wetlands) सबसे उत्पादक पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं। ये न केवल कार्बन सोखने का काम करती हैं, बल्कि जलवायु नियमन और जैव विविधता के लिए भी अनिवार्य हैं। हालांकि, भारत के महानगरों में एक भयावह स्थिति देखने को मिल रही है। हैदराबाद, बेंगलुरु और मुंबई जैसे शहरों में, जो भूमि कभी कृषि या प्राकृतिक जल संचयन क्षेत्र के रूप में काम करती थी, वह अब महंगे रियल एस्टेट में बदल चुकी है।

बढ़ता शहरीकरण और लुप्त होती झीलें

अनियोजित शहरीकरण ने जल निकायों को 'खाली भूमि' के रूप में देखने की मानसिकता विकसित कर दी है। विकासकर्ता और नगर निकाय इन प्राकृतिक संपत्तियों को पारिस्थितिक बुनियादी ढांचे के बजाय निर्माण के अवसर के रूप में देखते हैं। इसके परिणामस्वरूप, झीलें अतिक्रमण और प्रदूषण की चपेट में हैं। Comptroller and Auditor General (CAG) की रिपोर्टों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 1967 के बाद से 500 से अधिक झीलें सिकुड़ गई हैं। वहीं, हैदराबाद ने 1979 के बाद से अपने झील क्षेत्र का लगभग 61% हिस्सा खो दिया है।

झीलों का विनाश केवल अतिक्रमण का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उन्हें एक महत्वपूर्ण संसाधन मानने में हमारी विफलता है।

सौंदर्यीकरण बनाम वास्तविक बहाली

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वर्तमान में शहरी निकायों का ध्यान अक्सर 'दिखावटी सुधारों' पर अधिक होता है। नगर निगम अक्सर झीलों के किनारे लाइटें लगाने, फेंसिंग करने या प्रोमेनेड बनाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि झील के मुख्य पारिस्थितिक तंत्र—जैसे फीडर चैनल, जलग्रहण क्षेत्र (catchments) और जल की गुणवत्ता—को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

सफलता के मॉडल और आगे की राह

हालांकि स्थिति गंभीर है, लेकिन कुछ सकारात्मक उदाहरण भी सामने आए हैं। तेलंगाना की HYDRAA (Hyderabad Disaster Response and Asset Protection Agency) ने अवैध संरचनाओं को हटाकर और प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करके कई झीलों का पुनरुद्धार किया है। इसी तरह, बेंगलुरु में नागरिक आंदोलनों ने भी स्थानीय स्तर पर सफलता प्राप्त की है।

विशेषतासौंदर्यीकरण (Cosmetic Fix)पारिस्थितिक बहाली (Ecological Restoration)
मुख्य ध्यानलाइटिंग, वॉकवे, फेंसिंगफीडर चैनल, जल गुणवत्ता, जैव विविधता
स्थायित्वअल्पकालिकदीर्घकालिक और टिकाऊ
प्रभावदृश्य सुधारजलवायु लचीलापन और जल सुरक्षा
Did You Know?: आर्द्रभूमि (Wetlands) भूमि की तुलना में प्रति इकाई क्षेत्र में कहीं अधिक कार्बन सोखने की क्षमता रखती हैं।

Frequently Asked Questions

1. शहरी झीलों के गायब होने का मुख्य कारण क्या है?
अनियोजित शहरीकरण, रियल एस्टेट का दबाव और प्राकृतिक जल संचयन क्षेत्रों पर अतिक्रमण इसके मुख्य कारण हैं।

2. क्या केवल झील के किनारे पार्क बनाना पर्याप्त है?
नहीं, वास्तविक बहाली के लिए झील के फीडर चैनलों को साफ करना और उसके प्राकृतिक जल प्रवाह को बहाल करना आवश्यक है।