कर्नाटक सरकार के नए पार्क संशोधन विधेयक के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें पार्कों के 5% हिस्से को बुनियादी ढांचे के लिए उपयोग करने की अनुमति दी गई है। डेटा से पता चलता है कि राज्य के पास केवल 28 प्रमुख उद्यान हैं, जबकि बेंगलुरु जैसे शहरों में हरित क्षेत्र की भारी कमी है।

  • कर्नाटक सरकार के नए संशोधन के तहत पार्कों का 5% हिस्सा बुनियादी ढांचे के लिए दिया जा सकता है।
  • हॉर्टिकल्चर विभाग केवल 28 प्रमुख पार्कों और उद्यानों का प्रबंधन करता है।
  • बेंगलुरु का प्रसिद्ध लालबाग अब टनल रोड प्रोजेक्ट के निशाने पर है।
  • विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि निर्माण कार्यों से जैव विविधता और वन्यजीव आवास नष्ट हो सकते हैं।

कर्नाटक सरकार द्वारा पारित 'पार्क (संरक्षण) अधिनियम संशोधन विधेयक, 2026' ने राज्य में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। बागवानी विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक सरकार केवल 28 प्रमुख पार्कों और वनस्पति उद्यानों का प्रबंधन करती है, जो कुल 1,287 एकड़ में फैले हुए हैं। इसके विपरीत, पूरे राज्य में लगभग 5,000 पार्क हैं, जिनमें से 1,353 पार्क ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) और अन्य नगर निगमों के नियंत्रण में हैं।

इस विवादास्पद संशोधन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह किसी भी पार्क या उद्यान के 5% हिस्से को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे या उपयोगिता परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है। इस नियम का सबसे बड़ा प्रभाव बेंगलुरु के प्रतिष्ठित लालबाग पर पड़ सकता है, जिसे वर्तमान में प्रस्तावित टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए विचाराधीन रखा गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संशोधन शहरी नियोजन और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक खतरनाक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। यदि पार्कों के भीतर निर्माण कार्यों की अनुमति दी जाती है, तो यह न केवल हरित क्षेत्र को कम करेगा बल्कि पारिस्थितिक तंत्र को भी स्थायी नुकसान पहुँचाएगा।

बुनियादी ढांचे के निर्माण से मिट्टी ढीली हो जाती है, जिससे पेड़ों को हटाना पड़ सकता है, और अंततः पक्षियों, कीटों और अन्य छोटे जीवों का प्राकृतिक आवास समाप्त हो जाता है।

सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि कर्नाटक और विशेष रूप से बेंगलुरु, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों की तुलना में पार्कों के मामले में बेहतर स्थिति में है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु का ऊटी बॉटनिकल गार्डन केवल 55 एकड़ में है, जबकि बेंगलुरु के कब्बन पार्क और लालबाग सैकड़ों एकड़ में फैले हुए हैं। अधिकारियों ने 2011 के बाद से तुमकुरु, मैसूर और सिरसी जैसे क्षेत्रों में कई नए वनस्पति उद्यान विकसित करने का दावा भी किया है।

हालांकि, शहरी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इस विकास मॉडल पर सवाल उठाए हैं। अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की फैकल्टी सीमा मंडोली के अनुसार, बेंगलुरु के उपनगरीय इलाकों जैसे सरजापुर और इलेक्ट्रॉनिक सिटी में सार्वजनिक पार्कों की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि पार्क केवल सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक कल्याण के लिए भी अनिवार्य हैं।

ऐतिहासिक रूप से, बेंगलुरु को 'गार्डन सिटी' के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन अनियंत्रित शहरीकरण और अब इन नए संशोधनों ने इस पहचान को खतरे में डाल दिया है। यदि 5% का यह नियम लागू होता है, तो यह भविष्य में बड़े पैमाने पर शहरी वनों के विखंडन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

Did You Know?: बेंगलुरु का लालबाग बॉटनिकल गार्डन दशकों से दुर्लभ पौधों की प्रजातियों का एक प्रमुख केंद्र रहा है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: नया संशोधन क्या अनुमति देता है?
उत्तर: यह संशोधन किसी भी पार्क या उद्यान के 5% क्षेत्र को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे या उपयोगिता परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की अनुमति देता है।

प्रश्न 2: लालबाग पर इसका क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: लालबाग को प्रस्तावित टनल रोड प्रोजेक्ट के लिए उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे इसके कुछ हिस्से का निर्माण कार्य प्रभावित हो सकता है।