नए वैज्ञानिक साक्ष्यों से पता चला है कि नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ भारी बारिश या भूकंप के कारण नहीं, बल्कि लांगटांग लिरुंग के पास एक विशाल बर्फ-चट्टान के ढहने (ग्लेशियर टूटने) से आई थी। इस आपदा ने भोटे कोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली में भारी तबाही मचाई है और सैकड़ों लोगों की जान ले ली है।

  • लांगटांग लिरुंग के पास 5,200 मीटर की ऊंचाई पर एक विशाल बर्फ-चट्टान के ढहने से नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आई।
  • शुरुआत में जिसे 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया था, वह वास्तव में विशाल ग्लेशियर के गिरने से उत्पन्न कंपन था।
  • इस आपदा में नेपाल में 389 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं।

नेपाल की भोटे कोशी-त्रिशूली नदी प्रणाली में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस आपदा में नेपाल में कम से कम 389 लोगों और तिब्बत में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा और चितवन जैसे प्रभावित जिलों में सैकड़ों लोग विस्थापित हुए हैं। हालांकि भारत में अब तक किसी की मौत की खबर नहीं है, लेकिन नेपाल में मौजूद 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है, जबकि 84 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश के अधिकारी निचले इलाकों में बाढ़ के खतरों पर लगातार नजर रख रहे हैं।

शुरुआत में इस तबाही का कारण भारी बारिश या भूकंप को माना जा रहा था, लेकिन अब वैज्ञानिक साक्ष्य एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के विश्लेषण से पता चला है कि यह आपदा लांगटांग लिरुंग के पास लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ और चट्टान के एक विशाल हिस्से के ढहने से शुरू हुई थी। यह विशाल मलबा लगभग 1,200 मीटर नीचे ल्हेंडे खोला नदी प्रणाली में गिरा, जिससे नदी का मार्ग अस्थायी रूप से अवरुद्ध हो गया और बाद में आए उफान ने 100 किलोमीटर दूर तक के इलाकों में तबाही मचा दी।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, हिमालय में पर्माफ्रॉस्ट और ग्लेशियरों की स्थिरता तेजी से कमजोर हो रही है। यह घटना दर्शाती है कि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाले संरचनात्मक बदलाव बिना किसी भूकंपीय गतिविधि के भी उतनी ही बड़ी तबाही ला सकते हैं। विकासशील देशों को अब अपनी पूर्व चेतावनी प्रणालियों को केवल भूकंप और बारिश तक सीमित न रखकर ग्लेशियरों की निगरानी के लिए भी तैयार करना होगा।

"लांगटांग लिरुंग के ढहने से उत्पन्न गतिज ऊर्जा यह साबित करती है कि अत्यधिक ऊंचाई पर होने वाले संरचनात्मक बदलाव भूकंपीय तरंगें पैदा कर सकते हैं, जिससे हमारी पूर्व चेतावनी प्रणालियों को अपडेट करना अनिवार्य हो गया है।" - हिमालयी भू-खतरा विशेषज्ञ

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की आपदाएं नई नहीं हैं। साल 2021 में भारत के उत्तराखंड के चमोली में भी इसी तरह का एक हिम-चट्टान हिमस्खलन हुआ था, जिसने ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों में भारी तबाही मचाई थी। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण नाजुक हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से अस्थिर हो रहा है, जिससे भारत, नेपाल और चीन जैसे पड़ोसी देशों के लिए खतरा बढ़ गया है।

विशेषतानेपाल बर्फ-चट्टान हिमस्खलन (2026)दक्षिण ल्होनक GLOF (2023)
मुख्य कारणखड़ी पहाड़ी ढलान से बर्फ और चट्टान का अचानक ढहनाग्लेशियर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का टूटना
जल स्रोतमलबे के कारण नदी का अस्थायी रूप से रुकना और अचानक उफान आनाग्लेशियर झील में जमा पानी का अचानक बह जाना (लगभग 105 हेक्टेयर)
भूकंपीय प्रभाव4.4 तीव्रता के भूकंप के बराबर तीव्र सीस्मिक तरंगें उत्पन्न हुईंझील टूटने से कोई महत्वपूर्ण भूकंपीय तरंग उत्पन्न नहीं हुई थी
क्या आप जानते हैं?: एक विशाल भूस्खलन इतनी अधिक ऊर्जा उत्पन्न कर सकता है जो कई परमाणु बमों के बराबर होती है, जिससे पृथ्वी की सतह में ऐसी तरंगें उठती हैं जिन्हें हजारों मील दूर स्थित सीस्मोग्राफ भी रिकॉर्ड कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: वैज्ञानिकों को शुरुआत में ऐसा क्यों लगा कि नेपाल में बाढ़ भूकंप के कारण आई थी?
उत्तर: आपदा के समय सीस्मोमीटर ने 4.4 तीव्रता के भूकंप के समान तीव्र कंपन दर्ज किया था। हालांकि, बाद में पता चला कि यह कंपन भूकंप का नहीं, बल्कि पहाड़ी से गिरे विशाल मलबे और बर्फ की गतिज ऊर्जा के कारण उत्पन्न हुआ था।

प्रश्न 2: बर्फ-चट्टान हिमस्खलन और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) में क्या अंतर है?
उत्तर: GLOF तब होता है जब किसी ग्लेशियर झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और पानी बह निकलता है। इसके विपरीत, बर्फ-चट्टान हिमस्खलन में खड़ी ढलान से बर्फ और मलबे का विशाल हिस्सा सीधे नदी में गिरता है और कृत्रिम बांध बनाकर बाढ़ का कारण बनता है।