हिमालयी क्षेत्र में पिघलते ग्लेशियरों और झीलों के बढ़ते स्तर ने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने नदियों के प्राकृतिक रास्तों में मानवीय हस्तक्षेप को इस संभावित आपदा का मुख्य कारण बताया है।

  • हिमालयी क्षेत्र में 25 ग्लेशियर झीलें अत्यंत संवेदनशील श्रेणी में हैं।
  • नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में मानवीय हस्तक्षेप से आपदा का खतरा बढ़ गया है।
  • ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों के पिघलने से GLOF (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड) का जोखिम बढ़ रहा है।

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र वर्तमान में अपने सबसे नाजुक दौर से गुजर रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ग्लेशियर झीलों का अनियंत्रित विस्तार और उनका अचानक फटना (GLOF) पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी त्रासदी साबित हो सकता है। ब्रह्मा चेलानी, जो हिमालयी पर्यावरण के जाने-माने विशेषज्ञ हैं, ने स्पष्ट किया है कि नदियों के प्राकृतिक रास्तों में किया जा रहा मानवीय दखल इस खतरे को कई गुना बढ़ा रहा है।

हालिया आंकड़ों और तिब्बत एवं नेपाल में हुई हालिया आपदाओं के बाद, हिमालयी क्षेत्र की लगभग 200 ग्लेशियर झीलों पर खतरा मंडरा रहा है। इनमें से 25 झीलों को 'अति-संवेदनशील' माना गया है। उत्तराखंड में भी 13 संवेदनशील झीलें चिन्हित की गई हैं, जिनमें से 5 में GLOF की तत्काल आशंका है।

क्यों यह चिंता का विषय है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं, जिससे विशाल जल निकाय बन रहे हैं। जब ये झीलें अपनी क्षमता से अधिक भर जाती हैं या प्राकृतिक बांध टूट जाते हैं, तो अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) निचले इलाकों में बसे गांवों और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर सकती है।

नदियों के प्राकृतिक रास्तों और उनके बहाव क्षेत्र (Floodplains) में निर्माण कार्य करना मौत को दावत देने जैसा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि विकास के नाम पर पहाड़ों में किए जा रहे अनियंत्रित निर्माण और नदियों के किनारे अतिक्रमण ने आपदा के प्रभाव को और अधिक घातक बना दिया है। यदि समय रहते उचित प्रबंधन और निगरानी नहीं की गई, तो भविष्य में होने वाली आपदाएं केवल स्थानीय नहीं, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर तबाही मचा सकती हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं का इतिहास रहा है, लेकिन पिछले दो दशकों में ग्लेशियरों के पिघलने की दर में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। 2013 की केदारनाथ त्रासदी और हाल के वर्षों में नेपाल में आई बाढ़ इस बात का प्रमाण हैं कि हिमालयी पारिस्थितिकी कितनी अस्थिर हो चुकी है।

तुलनात्मक जोखिम विश्लेषण

क्षेत्रसंवेदनशील झीलों की संख्याखतरे का स्तर
उत्तराखंड13उच्च
हिमालयी क्षेत्र (कुल)25 (अति-संवेदनशील)अत्यधिक उच्च
नेपाल/तिब्बत क्षेत्रबढ़ता हुआगंभीर
Did You Know?: ग्लेशियर झील के फटने से आने वाली बाढ़ को GLOF कहा जाता है, जो बिना किसी चेतावनी के आती है।

Frequently Asked Questions

1. GLOF क्या है?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तब होता है जब ग्लेशियर के पास बनी झील का प्राकृतिक बांध टूट जाता है और अचानक भारी बाढ़ आती है।

2. हिमालयी क्षेत्र में सबसे अधिक खतरा किन राज्यों को है?
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे राज्यों में ग्लेशियर झीलों के फटने का सबसे अधिक जोखिम है।