मैसूर उपभोक्ता परिषद (MGP) ने सरकार द्वारा 'पार्क संरक्षण अधिनियम, 1975' में प्रस्तावित संशोधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह बदलाव पार्कों की भूमि को व्यावसायिक उपयोग के लिए खोलने का रास्ता साफ करेगा।
- मैसूर उपभोक्ता परिषद (MGP) ने पार्क संरक्षण अधिनियम में संशोधन का कड़ा विरोध किया है।
- प्रस्तावित संशोधन 5% पार्क भूमि को बेचने या पट्टे पर देने की अनुमति दे सकता है।
- विरोध प्रदर्शन मैसूर के चेलुवंबा पार्क में आयोजित किया गया।
- राज्यपाल से विधेयक पर रोक लगाने की मांग की गई है।
कर्नाटक सरकार द्वारा पार्क संरक्षण (सरकारी) अधिनियम, 1975 में संशोधन करने के कथित कदम ने राज्य में एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। रविवार, 30 अगस्त को मैसूर के ऐतिहासिक चेलुवंबा पार्क में आयोजित एक विशाल विरोध प्रदर्शन में पर्यावरणविदों, स्थानीय निवासियों और नागरिकों ने सरकार के इस फैसले की कड़ी निंदा की।
मैसूर उपभोक्ता परिषद (MGP) के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य प्रस्तावित संशोधन को तुरंत वापस लेना और सार्वजनिक पार्कों की अखंडता की रक्षा करना है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह संशोधन पार्कों और उद्यानों की भूमि के एक हिस्से को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और उपयोगिता परियोजनाओं के लिए उपयोग करने की अनुमति देकर धीरे-धीरे अतिक्रमण का मार्ग प्रशस्त करेगा।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल स्थानीय भूमि के उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य से जुड़ा है। यदि सरकार पार्क की भूमि के एक छोटे से हिस्से को भी व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की अनुमति देती है, तो यह भविष्य में बड़े पैमाने पर शहरी वनों के विनाश का कारण बन सकता है।
प्रस्तावित संशोधन पार्क की भूमि को बेचने, पट्टे पर देने या गिरवी रखने की अनुमति दे सकता है, जो पर्यावरण के लिए एक गंभीर खतरा है।
MGP के संस्थापक कार्यवाहक अध्यक्ष भामी वी. शेनॉय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि नया प्रावधान पार्क की भूमि के 5% हिस्से को बेचने, पट्टे पर देने, उपहार में देने, विनिमय करने या गिरवी रखने की अनुमति दे सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे ऐसे क्षेत्रों में होटल, बार और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान खड़े हो सकते हैं, जो पार्कों के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
पूर्व सांसद प्रताप सिम्हा ने भी प्रदर्शन में भाग लिया और सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पार्कों की संरक्षक बनने के बजाय उनके विनाश का कारण बन रही है। सिम्हा ने आशंका जताई कि इस संशोधन का उपयोग बेंगलुरु के लालबाग जैसे बड़े पार्कों में सुरंग परियोजनाओं या अन्य बुनियादी ढांचों के लिए किया जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पार्क संरक्षण (सरकारी) अधिनियम, 1975 को राज्य के हरित क्षेत्रों को अनधिकृत निर्माण और व्यावसायिक अतिक्रमण से बचाने के लिए बनाया गया था। वर्तमान में, यह अधिनियम केवल पार्क के रखरखाव के लिए सीमित भूमि उपयोग की अनुमति देता है, लेकिन प्रस्तावित संशोधन इस दायरे को व्यापक बनाने का प्रयास कर रहा है।
Frequently Asked Questions
1. मैसूर उपभोक्ता परिषद (MGP) की मुख्य मांग क्या है?
MGP की मांग है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत प्रस्तावित संशोधन को मंजूरी न दें ताकि पार्कों को सुरक्षित रखा जा सके।
2. प्रस्तावित संशोधन से क्या खतरा है?
विरोधियों का कहना है कि इससे पार्क की भूमि का उपयोग होटल और बार जैसे व्यावसायिक कार्यों के लिए हो सकता है।