वैश्विक प्रवाल भित्तियाँ इतनी तेज़ी से नष्ट हो रही हैं कि उन्हें ठीक होने का समय ही नहीं मिल रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान नहीं गिरा, तो यह गिरावट अपरिवर्तनीय हो सकती है।

  • वैश्विक प्रवाल आवरण सामान्य स्तर से काफी नीचे गिर गया है और अपरिवर्तनीय गिरावट के जोखिम में है।
  • 2010 के बाद से कोरल ब्लीचिंग की घटनाओं की आवृत्ति लगभग दोगुनी हो गई है।
  • 2023 में रिकॉर्ड 77% प्रवाल भित्तियाँ ब्लीचिंग से प्रभावित हुईं।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले प्रवाल भित्तियों (Coral Reefs) पर अब अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। ग्लोबल कोरल रीफ मॉनिटरिंग नेटवर्क (GCRMN) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में कोरल कवर सामान्य स्तर से काफी नीचे चला गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लीचिंग की घटनाएं इतनी बार हो रही हैं कि प्रवाल भित्तियों को अगली आपदा से पहले उबरने का समय ही नहीं मिल पा रहा है।

ऑस्ट्रेलियाई इंस्टीट्यूट ऑफ मरीन साइंस के वैज्ञानिक मैनुअल गोंजालेज रिवेरो ने स्पष्ट किया कि प्रवाल भित्तियों में स्वयं को ठीक करने की क्षमता होती है, लेकिन समस्या यह है कि उन्हें वह समय नहीं दिया जा रहा है। उनके अनुसार, 2010 तक वैश्विक स्तर पर कोरल कवर अपेक्षाकृत स्थिर था, लेकिन उसके बाद से इसमें तीव्र गिरावट देखी गई है।

ब्लीचिंग क्या है और यह क्यों खतरनाक है?

ब्लीचिंग तब होती है जब बढ़ते तापमान के कारण प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले रंगीन शैवाल (algae) को बाहर निकाल देते हैं। इन शैवाल के बिना, प्रवाल न केवल अपना रंग खो देते हैं, बल्कि वे भुखमरी और बीमारियों के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। हालांकि ब्लीचिंग का मतलब यह नहीं है कि प्रवाल मर चुके हैं, लेकिन उन्हें जीवित रहने के लिए ठंडे पानी और समय की आवश्यकता होती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल समुद्री जीवन का नुकसान नहीं है, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक और पर्यावरणीय आपदा है। प्रवाल भित्तियाँ समुद्र के तल का केवल 1% हिस्सा घेरती हैं, लेकिन वे समुद्री जीवन के 25% हिस्से को आश्रय प्रदान करती हैं। यदि ये नष्ट होते हैं, तो पूरी समुद्री खाद्य श्रृंखला ध्वस्त हो सकती है, जिससे दुनिया भर के मत्स्य पालन और तटीय सुरक्षा पर असर पड़ेगा।

"2023 की ब्लीचिंग अब तक की सबसे व्यापक घटना थी, जिसने दुनिया के 77 प्रतिशत प्रवाल भित्ति क्षेत्रों को प्रभावित किया।"

इस संकट के बीच, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी भी स्पष्ट दिख रही है। पैसिफिक आइलैंड्स फोरम के आगामी शिखर सम्मेलन में 18 देशों में से कम से कम पांच नेताओं की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों पर वैश्विक एकजुटता कम हो रही है।

अवधिकोरल की स्थितिमुख्य कारण
2010 से पहलेतुलनात्मक रूप से स्थिरस्थिर समुद्री तापमान
2010 के बादतीव्र गिरावटतापमान में वृद्धि और बार-बार ब्लीचिंग
क्या आप जानते हैं?: प्रवाल भित्तियों को 'समुद्र के वर्षावन' कहा जाता है क्योंकि वे दुनिया के सबसे विविध पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं।

Frequently Asked Questions

1. क्या ब्लीचिंग के बाद कोरल वापस आ सकते हैं?
हाँ, यदि पानी का तापमान समय रहते गिर जाए और नई ब्लीचिंग घटना न हो, तो प्रवाल स्वयं को पुनर्जीवित कर सकते हैं।

2. कोरल रीफ्स का मानव जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
ये तटों को तूफानों से बचाते हैं, पर्यटन को बढ़ावा देते हैं और करोड़ों लोगों के लिए भोजन का मुख्य स्रोत (मछली) प्रदान करते हैं।