भारत के गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू‑कश्मीर सहित सभी हिमालयीय राज्यों व यू.टी. को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन के जोखिम से निपटने के लिए सक्रिय एवं रोकथाम‑आधारित योजना बनाने का आदेश दिया। बैठक में चेतावनी प्रणालियों, निगरानी, निकासी और स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई।
- हिमालय में GLOF और हिमस्खलन के जोखिम बढ़ रहे हैं।
- प्रारम्भिक चेतावनी प्रणाली और स्थानीय निकासी योजना अनिवार्य।
- राज्य एवं यू.टी. को निरंतर मॉनिटरिंग और सामुदायिक तैयारियों पर ध्यान देना होगा।
मुख्य चर्चा बिंदु
गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित बैठक में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू‑कश्मीर के मुख्य सचिवों व आपदा प्रबंधन अधिकारियों को GLOF और हिमस्खलन से निपटने की वर्तमान तैयारियों की समीक्षा करने का निर्देश दिया। बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग और रक्षा जियोइन्फॉर्मेटिक्स रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया।
सभी राज्यों ने अपनी-अपनी जोखिम मानचित्रण, उच्च‑जोखिम क्षेत्रों की पहचान और मौजूदा चेतावनी तंत्र की कार्यक्षमता प्रस्तुत की। प्रमुख बिंदु में बर्फ‑आवृत झीलों की निरंतर निगरानी, प्रवाह‑मार्ग का मानचित्रण और समय पर अलर्ट जारी करना शामिल था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में हिमालय में कई गंभीर GLOF घटनाएँ हुई हैं, जैसे 2020 में उत्तराखंड के रौली गॉले में बाढ़, जिसने 30 से अधिक लोगों की जान ली। इसी प्रकार, 2022 में सिक्किम के ल्हाखांग में हिमस्खलन ने कई गाँवों को प्रभावित किया। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल आपातकालीन प्रतिक्रिया पर्याप्त नहीं, बल्कि रोकथाम एवं सतत तैयारी आवश्यक है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked glacial melt, accelerated by climate change, could double the frequency of GLOFs in the next decade, threatening millions across the sub‑continent. Proactive mitigation not only saves lives but also protects critical infrastructure such as hydro‑electric projects and trans‑Himalayan highways.
"सतत मॉनिटरिंग और स्थानीय स्तर पर जागरूकता ही हिमालयीय क्षेत्रों को भविष्य की आपदाओं से बचा सकती है," कहते हैं जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अर्चना सिंह।
राज्य और यू.टी. को केंद्र द्वारा 2024 में स्वीकृत GLOF शमन परियोजनाओं को तेज़ी से लागू करने का भी निर्देश दिया गया। इसके तहत बाढ़‑रोधी बांध, स्वचालित जल‑स्तर सेंसर और ड्रोन‑आधारित सर्वेक्षण शामिल हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: GLOF क्या है और इसका क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर: ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तब होता है जब बर्फ‑आवृत झील का जल अचानक बाहर निकलता है, जिससे नीचे की घाटियों में विनाशकारी बाढ़ आती है।
प्रश्न 2: आम नागरिक कैसे तैयार रह सकते हैं?
उत्तर: स्थानीय चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना, निकासी मार्गों से परिचित होना और आपदा‑प्रबंधन ऐप्स के माध्यम से रियल‑टाइम अपडेट प्राप्त करना आवश्यक है।